अभनपुर के टेकारी गांव में मृत महिला को जीवित दर्शाकर जमीन की रजिस्ट्री कर दो सप्ताह में दोबारा बिक्री किए जाने का मामला सामने आया है। राजस्व रिकॉर्ड म …और पढ़ें

HighLights
- मृत महिला को जीवित दिखाकर रजिस्ट्री
- दो सप्ताह में जमीन दोबारा बेच दी
- ऑनलाइन और मैनुअल रिकॉर्ड में अंतर
नईदुनिया प्रतिनिधि रायपुर। अभनपुर तहसील के टेकारी गांव की विवादित जमीन मामले में सामने आए नए तथ्यों ने पूरे सौदे को संदेह के घेरे में ला दिया है।
दस्तावेजों के अनुसार मृत व्यक्ति को जीवित दर्शाकर जमीन की रजिस्ट्री कराई और फिर महज दो सप्ताह के भीतर उसे आगे बेच दिया। राजस्व रिकार्ड में विसंगतियों के बावजूद खरीदी-बिक्री होने से अब खरीदार और विक्रेता की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है।
अन्नू तारक ने जमीन खरीदने के मात्र दो सप्ताह बाद 3 जुलाई 2025 को इसे कौशल और कपिल तरवानी को बेच दिया था, इन पर भी संदेह जताया जा रहा है।
मृतक को जिंदा दिखाकर हुई रजिस्ट्री राजस्व अभिलेखों के मुताबिक संबंधित जमीन पहले से बोधनी वर्मा और शारदा वर्मा के नाम दर्ज थी। शारदा वर्मा का निधन 23 अप्रैल 2021 को हो चुका था। इसके बावजूद स्टाम्प दस्तावेज बताते हैं कि 24 जून 2025 को इसी जमीन की रजिस्ट्री अन्नू तारक के नाम पर कर दी गई। यानी चार वर्ष पहले दिवंगत हो चुकी महिला को दस्तावेजों में जीवित बताकर सौदा किया गया।
दो सप्ताह में बदल गया मालिक
रिकार्ड के अनुसार अन्नू तारक ने जमीन खरीदने के मात्र दो सप्ताह बाद बेच दिया। इतनी कम अवधि में पुनः विक्री होने से सौदे की मंशा और प्रक्रिया पर संदेश और गहरा गया है। अधिकारियों का मानना है कि यदि दस्तावेजों की ठीक से जांच की जाती तो विवाद उसी समय सामने आ सकता था।
वसीयत भी नहीं रही प्रभावी यह तथ्य भी सामने आया कि शारदा वर्मा ने वर्ष 2018-19 में पुत्र गुलाब वां के नाम वसीयत लिखी थी। लेकिन गुलाब वर्मा की भी 24 फरवरी 2024 को मृत्यु हो चुकी है। नियमों के अनुसार वसीयत प्राप्तकर्ता के जीवित नहीं रहने की स्थिति में वसीयत स्वतः प्रभावहीन हो जाती है। इसके बावजूद बाद में वारिसों की अपील पर 20 नवंबर 2025 को नामांतरण आदेश जारी कर दिया गया।
रिकार्ड में दो अलग-अलग नाम
वर्तमान स्थिति में आनलाइन राजस्व रिकार्ड में जमीन कौशल और कपिल तरवानी के नाम है, जबकि मैनुअल रिकार्ड अब भी वर्मा परिवार के नाम दर्शा रहा है। एक ही जमीन के अलग-अलग रिकार्ड होना राजस्व प्रक्रिया की खामी मानी जा रही है।
जिम्मेदारी से नहीं बच सकते पक्षकार
- राजस्व विशेषज्ञों के अनुसार संपत्ति की खरीदी-बिक्री में केवल सरकारी प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि सौदा करने वाले पक्षों की भी जिम्मेदारी तय होती है। मृत्यु दर्ज होने, वसीयत विवादित होने और रिकार्ड में अंतर होने के बावजूद लगातार सौदे होना यह दर्शाता है कि पर्याप्त सत्यापन नहीं किया या जानबूझकर अनदेखी की गई। मामला प्रशासनिक जांच के दायरे में है।
- अधिकारियों का कहना है कि दस्तावेजों की वैधता, रजिस्ट्री प्रक्रिया और नामांतरण आदेश की अलग-अलग स्तर पर जांच की जाएगी। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि यह लापरवाही थी या सगठित तरीके से किया गया जमीन का फर्जीवाड़ा।
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