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सीजीपीएससी चयन परिणाम को चुनौती देने वाली याचिका हाई कोर्ट ने खारिज की, नई याचिका दायर करने की छूट

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के चयन परिणाम में अन्य पिछड़ा वर्ग के कुछ अभ्यर्थियों को अनारक्षित वर्ग में शामिल किए जाने के आरोप को लेकर दायर याचिका को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है। जस्टिस बिभु दत्ता गुरु ने कहा कि जिन अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी पर सवाल उठाया गया है, उन्हें पक्षकार बनाए बिना मामले का प्रभावी और पूर्ण निराकरण नहीं किया जा सकता।

याचिकाकर्ता दीपक कुमार कुशवाहा, पिता जयप्रकाश कुशवाहा, उम्र 32 वर्ष, निवासी ग्राम अमहर बैकुंठपुर और प्रदीप चंद्र, पिता सुरेश कुमार चंद्र, उम्र 29 वर्ष, निवासी ग्राम केकराभाठ जैजैपुर सक्ती ने सीजीपीएससी द्वारा घोषित परिणाम को चुनौती दी थी।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि ओबीसी (एनसीएल) वर्ग के कुछ अभ्यर्थियों को अनारक्षित वर्ग में शामिल होकर चयन प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति दी गई। इससे उनकी उम्मीदवारी प्रभावित हुई।

याचिकाकर्ताओं ने सक्षम अधिकारियों के समक्ष अभ्यावेदन देने की बात भी कही, लेकिन निर्णय नहीं होने का हवाला दिया। सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से प्रारंभिक आपत्ति उठाई गई कि जिन अभ्यर्थियों की अनारक्षित वर्ग में भागीदारी पर सवाल है, उन्हें मामले में पक्षकार ही नहीं बनाया गया है।

हाई कोर्ट ने पाया कि याचिका में उन अभ्यर्थियों को पक्षकार नहीं बनाया गया और यह भी स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया कि किन अभ्यर्थियों को सामान्य वर्ग में शामिल किए जाने से याचिकाकर्ताओं की उम्मीदवारी प्रभावित हुई।

कोर्ट ने कहा कि मांगी गई राहत से संबंधित अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी और चयन प्रक्रिया में उनकी स्थिति सीधे प्रभावित हो सकती है। इसलिए उनकी मौजूदगी और चयन सूची में शामिल किए जाने संबंधी आवश्यक पक्षकारिता जरूरी है।

कोर्ट ने आवश्यक पक्षकारों को शामिल नहीं करने के आधार पर याचिका खारिज कर दी। हालांकि, याचिकाकर्ताओं को सभी आवश्यक पक्षकारों के साथ नई, विधिवत गठित रिट याचिका दायर करने की स्वतंत्रता दी है।

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