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Home » छत्तीसगढ़ के सिर्फ एक जिले में ही मनरेगा में 25 लाख रुपये के भ्रष्टाचार का सामने आया मामला
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छत्तीसगढ़ के सिर्फ एक जिले में ही मनरेगा में 25 लाख रुपये के भ्रष्टाचार का सामने आया मामला

By adminJanuary 14, 2026No Comments3 Mins Read
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14 01 2026 manrega
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राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) इन दिनों सियासी और प्रशासनिक चर्चाओं के केंद्र में है। केंद्र सरकार ने हाल ही में योजना का नाम बदलकर विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन–ग्रामीण (वीबी-जी राम जी) कर दिया है। इस बदलाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

इसी बीच प्रदेश में मनरेगा की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। प्रदेश के सिर्फ एक जिले कवर्धा से मनरेगा में करीब 25 लाख रुपये की भ्रष्टाचार का राजफाश हुआ है।

इस तरह मामला हुआ उजागर

यह मामला तब उजागर हुआ, जब केंद्र सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में मनरेगा कार्यों की वास्तविक स्थिति परखने के लिए देश के 25 राज्यों के 55 जिलों में औचक जांच कराई। इसमें प्रदेश से कवर्धा जिले को शामिल किया गया था।

अधिकारियों के अनुसार, जल संसाधन विभाग से जुड़े कुल तीन प्रकरणों में 19.34 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता पाई गई। इनमें से नौ लाख, 52 हजार रुपये की राशि की वसूली की जा चुकी है, जबकि शेष राशि की वसूली की प्रक्रिया जारी है।

वहीं, पंचायत स्तर पर कराए गए कार्यों में तीन लाख, 92 हजार रुपये की अनियमितता सामने आई, जिसकी पूरी राशि वसूल कर ली गई है। जानकारों का कहना है कि यदि प्रदेश के सभी जिलों में मनरेगा कार्यों का गहन ऑडिट कराया जाए, तो भ्रष्टाचार की वास्तविक तस्वीर इससे कहीं अधिक भयावह हो सकती है।

राजनांदगांव और सरगुजा में कराई गई जांच

अधिकारियों का दावा है कि विगत छह से आठ माह के मध्य राजनांदगांव और सरगुजा जिले में ऑडिट कराई गई है। दोनों जिलों से कोई अनियमितता नहीं पाई गई है। दोनों जिलों की रिपोर्ट केंद्रीय पंचायत मंत्रालय को भेजी गई है। मंत्रालय की ओर से दोनों जिलों में मनरेगा के तहत किए गए कार्यों की प्रशंसा की गई है।

यह भी पढ़ें- मृत और गांव से जा चुके लोगों के नाम किया भ्रष्टाचार, सरपंच समेत 4 दोषियों को 10-10 साल की सजा

मनरेगा कर्मियों के लिए नहीं बनी मानव संसाधन नीति

प्रदेश में मनरेगा कर्मियों के लिए अब तक स्पष्ट मानव संसाधन नीति नहीं बन पाई है। इससे योजना के क्रियान्वयन में अहम भूमिका निभा रहे कर्मियों में नाराजगी है। पंचायत मंत्री विजय शर्मा के निर्देश पर 29 अगस्त 2024 को मानव संसाधन नीति के लिए एक समिति का गठन किया गया था, जिसे 15 दिनों के भीतर राज्य शासन को प्रतिवेदन सौंपना था, लेकिन कई माह बीत जाने के बाद भी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की जा सकी है।

समिति के अध्यक्ष पंचायत व ग्रामीण विकास विभाग के सचिव राजेश सिंह राणा तथा सदस्य सचिव मनरेगा के संयुक्त आयुक्त संतोष सिंह ठाकुर बनाए गए थे। समिति में प्रभारी संयुक्त संचालक (वित्त) वीरेन्द्र कुमार बाघ, मनरेगा उपायुक्त आरके शर्मा व रामधन श्रीवास, नोडल अधिकारी (एमआइएस) समी मजहर खान, कार्यक्रम अधिकारी सुनील कुमार मिश्रा और लेखापाल अजय सिंह क्षत्री को सदस्य नियुक्त किया गया था।

मनरेगाकर्मियों का कहना है कि 20 वर्षों से योजना के सफल क्रियान्वयन में योगदान दे रहे हैं, लेकिन आज तक उन्हें न तो स्थायी सेवा शर्तें मिली हैं और न ही सामाजिक सुरक्षा का लाभ। नीति के अभाव में कर्मचारी असुरक्षा और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं। इसी कारण अब मनरेगा कर्मी आंदोलन की रणनीति बनाने में जुट गए हैं।

जांच में अनियमितताएं सामने आई थीं, जिन पर नियमानुसार वसूली के प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई की गई है। आगे यदि कोई नई जानकारी या अनियमितता सामने आती है तो दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

-तारण प्रकाश सिन्हा, आयुक्त, वीबी-जी राम जी



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