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मिडिल-ईस्ट में चल रहे युद्ध के चलते लोगों में बेचैनी बढ़ गई है, जिसके कारण जमाखोरी और कालाबाजारी की स्थिति बन रही है। इस बीच कलेक्टर संजय अग्रवाल ने बताया कि बिलासपुर जिले में पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति लगातार बनी हुई है और कहीं कोई दिक्कत नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर सप्लाई पूरी तरह बंद भी हो जाए, तो भी जिले के पेट्रोल पंपों पर करीब पांच दिन का पेट्रोल और साढ़े पांच दिन का डीजल उपलब्ध रहेगा। यानी जिले में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।हालांकि गैस सिलेंडर की आपूर्ति मांग के मुकाबले काफी कम है। जिले में रोजाना करीब 9 हजार घरेलू गैस सिलेंडर आ रहे हैं, जबकि औसत दैनिक मांग 22 हजार है। इस तरह करीब 13 हजार सिलेंडरों की कमी बनी हुई है। इसके बावजूद लोगों को गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। हाल के दिनों में ईंधन की मांग जरूर बढ़ी है, लेकिन इसका मुख्य कारण वास्तविक कमी नहीं, बल्कि लोगों का जरूरत से ज्यादा स्टॉक करना है। लोग घबराहट में जरूरत से ज्यादा खरीदारी कर रहे कलेक्ट्रेट के मंथन सभाकक्ष में कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा कि जिले में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है और पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गैस सिलेंडर की भी कमी नहीं है, लेकिन लोग घबराहट में जरूरत से ज्यादा खरीदारी कर रहे हैं, जिससे बिक्री बढ़ गई है। देशहित में इस समय खाड़ी देशों से आने वाली वस्तुओं की खपत कम करने की जरूरत है, लेकिन इसके विपरीत लोग अधिक मात्रा में खरीदारी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जो उपभोक्ता पिछले 6 से 9 महीनों से सिलेंडर नहीं ले रहे थे, वे भी अब बुकिंग करा रहे हैं। इसी कारण सोमवार को ओपनिंग डिमांड बढ़कर 27 हजार सिलेंडर तक पहुंच गई। जानिए जिले में ऑयल और गैस सिलेंडर की स्थिति जिले में 171 पेट्रोल पंप हैं। प्रशासन ने वर्तमान में 1209 किलोलीटर पेट्रोल तो 1429 किलोलीटर डीजल का स्टॉक होना बताया है। वहीं जिले में पेट्रोल की रोजाना खपत 250 किलोलीटर तो डीजल की खपत 260 किलो लीटर है। यानी इतना पेट्रोल-डीजल रोज बिक रहा है। ऑयल कंपनियों के अधिकारियों के मुताबिक इतना पेट्रोल-डीजल रोज ही पंपों में पहुंच रहा है। ऑयल कंपनियों के साथ ही प्रशासन ने आपूर्ति बाधित नहीं होने का दावा किया है। लेकिन किसी भी वजह से आपूर्ति बंद हुई, तब भी जिले में कुछ दिन पेट्रोल-डीजल मिलता रहेगा। पेट्रोल का 4.8 दिन का तो डीजल का 5.49 दिन का स्टॉक मौजूद है। सामान्य दिनों से 7% बढ़ी पेट्रोल-डीजल की बिक्री ऑयल कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि सामान्य दिनों की तुलना में पेट्रोल–डीजल की बिक्री में 5 से 7 प्रतिशत तक का उछाल आया है। जैसे बीपीसीएल के पंपों में फरवरी में रोजाना 70 किलो लीटर पेट्रोल तो 100 किलो लीटर डीजल बिक रहा था, जो क्रमश: बढ़कर 100 और 120 किलो लीटर हो गया है। इस तरह पेट्रोल-डीजल में सभी कंपनियों को मिलाकर 20 से 30 किलोलीटर की बिक्री बढ़ गई है। अधिकारियों को लोगों के पेट्रोल-डीजल स्टोरेज करने की आशंका है। इधर गैस की डिमांड दोगुनी से ज्यादा हो गई है। जिले में 9 हजार सिलेंडर की रोजाना डिमांड थी, जो बढ़कर 22 हजार तक पहुंच गई है। कलेक्टर बोले–पैनिक न हों, पर्याप्त स्टॉक कलेक्टर ने बताया कि व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की आपूर्ति 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 70 प्रतिशत कर दी गई है। जिले में प्रतिदिन करीब 9 हजार सिलेंडर पहुंच रहे हैं। वर्तमान में गैस सिलेंडर लगभग 25 दिन में मिल जा रहा है, लेकिन यदि इसी तरह मांग बढ़ती रही और जहाजों के आने में देरी हुई, तो सिलेंडर मिलने में दो महीने तक का समय लग सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में बेहतर है कि लोग अपनी जरूरतों को सीमित रखें और किसी भी हालत में पेट्रोल-डीजल या गैस सिलेंडर का स्टोरेज न करें। जिले में कुल 4.30 लाख गैस कनेक्शन हैं, जिनमें 1.90 लाख सामान्य और 2.40 लाख उज्ज्वला कनेक्शन शामिल हैं। कलेक्टर ने बताया कि लंबे समय से गैस नहीं लेने वाले उज्ज्वला कनेक्शन धारकों की अचानक बुकिंग से सिलेंडरों की मांग में तेजी आई है। अफवाहों से बढ़ रही भीड़, प्रशासन सतर्क कलेक्टर अग्रवाल ने कहा कि कुछ स्थानों पर ईंधन की अचानक बढ़ी मांग का कारण अफवाहें हैं। लोग जरूरत से ज्यादा पेट्रोल-डीजल और गैस खरीदकर स्टॉक कर रहे हैं, जिससे अनावश्यक दबाव बन रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह की घबराहट से कृत्रिम संकट की स्थिति बन सकती है, जबकि वास्तविकता में सप्लाई पूरी तरह सामान्य है। संयम और जिम्मेदारी की जरूरत प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि केवल जरूरत के अनुसार ही ईंधन खरीदें। अनावश्यक भंडारण से बचें। अफवाहों पर ध्यान न दें। पेट्रोल-डीजल और गैस का उपयोग सोच-समझकर करें। जहां संभव हो, वैकल्पिक साधनों के उपयोग पर भी जोर दिया गया है, ताकि संसाधनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित हो सके।
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