एनसीपी नेता रामअवतार जग्गी हत्याकांड में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सीबीआई की अपील को स्वीकार करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी को द …और पढ़ें

HighLights
- 23 साल पुराना राम अवतार जग्गी हत्याकांड।
- अमित जोगी को हाईकोर्ट से बड़ा झटका।
- अमित जोगी को 21 दिन में करना होगा सरेंडर
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। एनसीपी नेता रामअवतार जग्गी हत्याकांड में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। कोर्ट ने सीबीआइ की अपील को स्वीकार करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने उन्हें तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पुनर्विचार
सुप्रीम कोर्ट में सीबीआइ और जग्गी के बेटे सतीश ने अलग-अलग याचिकाएं दायर कर हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। सतीश जग्गी के अधिवक्ता बीपी शर्मा ने चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा की डिवीजन बेंच को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने मामले को पुनर्विचार के लिए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट भेज दिया है। सीबीआइ के अधिवक्ता वैभव ए. गोवर्धन और राज्य के उप महाधिवक्ता डा. सौरभ पांडेय ने 31 मई 2007 को ट्रायल कोर्ट द्वारा अमित जोगी को बरी करने के फैसले के खिलाफ अपील करने की अनुमति मांगी थी।
याचिकाओं का कानूनी सफर
सीबीआइ की याचिका को पहले हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया था। 31 मई 2007 को दायर की गई याचिका को कोर्ट की समन्वय पीठ ने 12 सितंबर 2011 को विलंब के आधार पर खारिज किया था। इसके अतिरिक्त, सतीश जग्गी द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिका को भी 19 सितंबर 2011 को खारिज कर दिया गया था।
सतीश जग्गी और सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने छह नवंबर 2025 के आदेश के तहत याचिका दायर करने में हुई देरी को क्षमा कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने सतीश जग्गी और राज्य सरकार को आवश्यक पक्षकार बनाने का निर्देश दिया।
23 साल पहले हुआ था हत्याकांड
रामअवतार जग्गी की हत्या चार जून 2003 को रायपुर में हुई थी। इस मामले में 31 लोगों को आरोपित किया गया था, जिनमें से अमित जोगी को छोड़कर बाकी सभी को दोषी ठहराया गया था। जग्गी पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. विद्याचरण शुक्ल के करीबी सहयोगी थे।
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