कोरबा में पटवारी लामबंद, काम के दबाव से परेशान:कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, बोले- ऑफिस में रहेंगे तो फील्ड का काम कौन करेगा ?

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कोरबा जिले में काम के बढ़ते दबाव और संसाधनों की कमी को लेकर पटवारी लामबंद हो गए हैं। राजस्व पटवारी संघ ने जिला स्तरीय बैठक कर अपनी समस्याओं पर चर्चा की और इसके बाद कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। पटवारियों ने अधिकारियों पर तय समय से पहले काम पूरा करने का दबाव बनाने और छुट्टियों में भी बैठकें आयोजित करने का आरोप लगाया है। पटवारियों का कहना है कि डिजिटल गिरदावरी, एग्रीस्टैक पंजीयन, नक्शा बटांकन समेत कई अतिरिक्त कार्य लगातार बढ़ाए जा रहे हैं। बारिश के मौसम में खेतों में जाकर गिरदावरी और नक्शा नापने में परेशानी होती है, इसके बावजूद अधिकारियों की ओर से रोज नई समय-सीमा तय की जा रही है। 17 अगस्त से 30 सितंबर तक है गिरदावरी की समय-सीमा पटवारी संघ के जिला अध्यक्ष मिथिलेश वर्मा ने बताया कि वर्तमान में डीसीएस और ऑनलाइन गिरदावरी का काम चल रहा है। शासन ने गिरदावरी के लिए 17 अगस्त से 30 सितंबर तक का समय निर्धारित किया है, लेकिन अधिकारियों की ओर से इसे 2, 5 या 7 दिनों में पूरा करने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने एग्रीस्टैक में किसानों की बकेट आईडी बनाने का काम भी पटवारियों से कराए जाने की बात कही। वर्मा के अनुसार, इसका नोडल विभाग कृषि विभाग है, लेकिन काम का पूरा बोझ पटवारियों पर डाल दिया गया है। बोले- निजी खर्च पर कर रहे काम संघ के जिला प्रवक्ता ओम प्रकाश प्रधान ने कहा कि पटवारियों की कोई नई मांग नहीं है। उनका कहना है कि वे कई शासकीय कार्य अपने निजी संसाधनों और खर्च पर कर रहे हैं। डीसीएस और गिरदावरी के अलावा नक्शा तरमीम, शादी अनुदान समेत अन्य विभागों के काम भी पटवारियों से कराए जा रहे हैं। प्रधान ने नए आदेश का हवाला देते हुए कहा कि पटवारियों को सुबह 10 बजे से शाम 5:30 बजे तक कार्यालय में उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पटवारी पूरे दिन कार्यालय में रहेंगे, तो खेतों और गांवों में होने वाला फील्ड का काम कौन करेगा? पटवारी संघ ने काम के लिए पर्याप्त समय और संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही छुट्टियों में बैठकें और अनावश्यक समय-सीमा का दबाव कम करने की मांग अधिकारियों के सामने रखी है।
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