![]()
.
पीएम फसल बीमा योजना के तहत पंजीयन कराने पोर्टल को 9 दिन बाद दोबारा खोला गया है। जिसकी पुष्टि शनिवार को कृषि विभाग ने की है। इच्छुक किसान 15 जनवरी तक पंजीयन करवा सकते है। कृषि विभाग के अनुसार अब तक जिले के 10 हजार 510 किसान 12 हजार 122 हे. में लगी 4 फसलों का बीमा करवा चुके है। वर्ष 2024-25 में 10 हजार 695 किसानों ने 13 हजार 482 हे. में लगी गेहूं, चना, सरसों एवं अलसी फसल का बीमा कराया था।
इस लिहाज से पिछले साल की तुलना अब तक कम किसानों ने पंजीयन कराया है। हालांकि विभाग का दावा है कि अगले 5 दिन में आंकड़ा बढ़ने के साथ रिकॉर्ड ब्रेक हो सकता है। इच्छुक किसानों को पहले चार फसल गेहूं, सरसों, चना, अलसी का बीमा कराने 31 दिसंबर तक मौका दिया गया था। कृषि विभाग के उप संचालक आशीष चंद्राकर ने बताया कि वर्ष 2023-24 में 9 हजार 855 किसानों ने 10 हजार 31 हेक्टेयर में लगी 4 फसलों का बीमा कराया था। फसल नुकसान का क्लेम करने पर 2 हजार 484 किसानों को 2.22 करोड़ रुपए भुगतान हुआ था। वहीं रबी सीजन 2024-25 में बीमित जिले के 3 हजार 417 किसानों को 5 करोड़ 78 लाख रुपए का भुगतान हुआ था।
प्रीमियम दर 1.5%, अलसी के लिए प्रति हेक्टेयर 255 रुपए तय गेहूं, सरसों, चना, अलसी को अधिसूचित फसलों में शामिल कर प्रति हेक्टेयर ऋणमान, प्रीमियम दर, प्रीमियम राशि निर्धारित किया गया है। गेहूं सिंचित के लिए प्रति हेक्टेयर ऋणमान 38 हजार रुपए और प्रीमियम दर 1.5% निर्धारित है। प्रीमियम राशि 570 रुपए तय है। गेहूं असिंचित के लिए ऋणमान 25 हजार रुपए और प्रीमियम दर 1.5% निर्धारित है। प्रीमियम राशि 370 रुपए तय है। चना के लिए ऋणमान 42 हजार रुपए और प्रीमियम दर 1.5% निर्धारित है। प्रीमियम राशि 630 रुपए तय है। सरसों के लिए ऋणमान 28 हजार रुपए और प्रीमियम दर 1.5% निर्धारित है। प्रीमियम राशि 420 रुपए तय है। अलसी के लिए ऋणमान 17 हजार रुपए और प्रीमियम दर 1.5% निर्धारित है। प्रीमियम राशि 255 रुपए तय है।
रबी सीजन इसलिए बीमा नहीं हो पाएगा कृषि विभाग, जिला प्रशासन की ओर से अऋणी किसानों से अपील किया गया है कि बीमा कराने के लिए अंतिम तिथि का इंतजार न करें। इसके पहले अधिसूचित फसल का बीमा पंजीयन कराएं। रबी सीजन में किसान धान फसल का बीमा नहीं करवा सकेंगे। पिछले साल की तरह इस बार भी रबी सीजन में चना, गेंहू के अलावा सरसों, अलसी फसल का बीमा कराने प्रीमियम राशि तय किया गया है। किसानोंे को स्पष्ट सूचना दी गई है कि धान फसल के लिए बीमा नहीं होगा।
धान बेचने में व्यस्त हैं किसान, बीमा नहीं वर्तमान में कृषि विभाग के अफसर व कर्मचारी खेतों व गांवों में पहुंचकर किसानों को बीमा कराने अपील कर रहें है ताकि प्राकृतिक आपदा आने पर नुकसान की भरपाई हो सकें। विभागीय अफसरों के अनुसार धान फसल की कटाई, मिंजाई व उपज बेचने में किसान व्यस्त है। इस वजह से भी पंजीकृत किसानों की संख्या कम है। पोर्टल खुला है। ऐसे में आगे भी किसानों के आंकड़े बढ़ते क्रम पर रहने का दावा है। पिछले साल की तुलना में इस बार कम किसान पंजीयन कराएंगे या ज्यादा, यह 15 जनवरी के बाद स्पष्ट होगा।
<
