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रायपुर-जबलपुर एक्सप्रेस (11701/11702) का नाम बदलकर अब ‘मूक माटी एक्सप्रेस’ कर दिया है। रेलवे बोर्ड की मंजूरी के बाद यह बदलाव लागू किया गया है। इस नामकरण के जरिए रेलवे ने क्षेत्रीय संस्कृति, धरती से जुड़ाव और सामाजिक मूल्यों को सम्मान देने का संदेश दि
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धरती और संस्कृति का प्रतीक है ‘मूक माटी’ ‘मूक माटी’ नाम छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल इलाकों की उस मिट्टी का प्रतीक है, जो बिना बोले भी अपनी समृद्ध परंपराओं, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक मूल्यों को जीवंत रखती है। रेलवे का कहना है कि यह नाम स्थानीय जनभावनाओं और सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने की दिशा में एक प्रयास है।
आचार्य विद्यासागर महाराज के विचारों से प्रेरणा ट्रेन का नामकरण संत शिरोमणि आचार्य 108 विद्यासागर महाराज के अहिंसा, सत्य, संयम और मानवता के विचारों से प्रेरित बताया गया है। रेलवे के अनुसार, यह नाम इस भावना को दर्शाता है कि रेल यात्रा केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि मानवीय और सामाजिक मूल्यों से जुड़ने का माध्यम भी हो सकती है।
यात्रियों के लिए सब कुछ पहले जैसा रेलवे ने साफ किया है कि नाम बदलने के अलावा किसी भी सेवा में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
ट्रेन नंबर: 11701/11702 (यथावत)
रूट, समय-सारिणी और कोच संरचना: कोई बदलाव नहीं
आरक्षण टिकट, चार्ट, NTES और अन्य यात्री सूचना प्रणालियों में अब नया नाम ‘मूक माटी एक्सप्रेस’ दिखेगा।
सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की पहल भारतीय रेल का कहना है कि वह आधुनिक और यात्री-केंद्रित सेवाओं के साथ-साथ क्षेत्रीय सांस्कृतिक पहचान को सशक्त करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। ‘मूक माटी एक्सप्रेस’ इसी सोच का प्रतीक है, जो यात्रियों को यात्रा के दौरान धरती, संस्कृति और सामाजिक मूल्यों से जोड़ने का संदेश देती है
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