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बालोद जिला अपने 14 साल पूरा कर आज 15वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। जिला बनने के बाद से हमारा जिला आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक क्षेत्रों में लगातार प्रगति कर रहा है। कई क्षेत्रों में विकास के नए-नए कीर्तिमान रच रहा है। 10 जनवरी 2012 को बालोद जिला अस्तित्व में आया था। तब से अब तक जनहित से जुड़े कई विकास कार्य हो चुके है, कई काम होना बाकी है। ऐसे में आगे भी विकास की गति रफ्तार पकड़ेगी। एनएच 930 के तहत दूसरे चरण में शेरपार से कोहका महाराष्ट्र बॉर्डर तक डामरीकरण, चौड़ीकरण काम पूरा हो चुका है।
48 किमी लंबी सड़क 10 से 12 मीटर चौड़ी होने से लोगों को आने-जाने में सहूलियत मिल रही है। पहले चरण में झलमला से शेरपार तक काम हुआ था। दो चरण में काम पूरा होने के बाद यह एनएच छग को महाराष्ट्र व तेलंगाना से जोड़ेगी। एनएच विभाग का दावा है कि लोगों को 165 किमी अतिरिक्त सफर नहीं करना पड़ेगा।
इसके अलावा डेढ़ घंटे की बचत होगी। साढ़े 10 घंटे में महाराष्ट्र, तेलंगाना का सफर कार से नागपुर महाराष्ट्र से होकर हैदराबाद तेलंंगाना जाने के लिए लोगों को औसत 12 से 13 घंटे का सफर करना पड़ रहा था। एनएच 930 के बजाय लोग वहां तक पहुंचने के लिए कांकेर-जगदलपुर होकर एनएच 63 और एनएच 163 का उपयोग कर रहें थे। इसके अलावा राजनांदगांव से होकर जाना पड़ रहा था। बालोद से एनएच 930 होते हुए हैदराबाद की दूरी 586.8 किमी है। वहीं कांकेर से दूरी 682.2 किमी है। बालोद से कांकेर की दूरी 70 किमी है।
इस हिसाब से कांकेर से होकर हैदराबाद पहुंचने में 752.2 किमी का सफर करना पड़ रहा था। जिले के लोग कांकेर के बजाय बालोद एनएच 930 से होते हुए हैदराबाद जाएंगे तो 165.4 किमी कम सफर करना पड़ेगा। बालोद से हैदराबाद तक कार से सफर करने वाले आलोक हिरवानी ने बताया कि पहले शेरपार से कोहका महाराष्ट्र तक सड़क खराब होने की वजह से राजनांदगांव से होकर नागपुर, हैदराबाद जाने की नौबत आ रही थी, अब एनएच 930 से 12 के बजाय साढ़े 10 या 10 घंटे में ही हैदराबाद पहुंचने में आसानी होने के अलावा डेढ़ से दो घंटे का समय बच रहा है।
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