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Home » Kawasi Lakhma Released | Chhattisgarh Liquor Scam
Breaking News

Kawasi Lakhma Released | Chhattisgarh Liquor Scam

By adminFebruary 5, 2026No Comments8 Mins Read
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379 दिन बाद पूर्व मंत्री कवासी लखमा रायपुर सेंट्रल जेल से बाहर आ गए हैं। लखमा के जेल से बाहर निकलते ही कार्यकर्ताओं-नेताओं ने फूल माला पहनाकर उनका स्वागत किया। इसके बाद कांग्रेस नेता गिरीश देवांगन से गले मिले। फिर लखमा ने महात्मा गांधी की प्रतिमा पर

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इस दौरान बेटे हरीश लखमा, विधायक विक्रम मंडावी, सावित्री मंडावी, पूर्व विधायक विकास उपाध्याय, कांग्रेस नेता गिरीश देवांगन, प्रमोद दुबे और संतराम नेताम मौजूद रहे। कवासी गाड़ी पर सवार होकर निकले। सड़क पर लंबा जाम लग गया। जेल से निकलकर वे अपने आवास के लिए रवाना हुए।

इससे पहले कवासी लखमा ने कहा कि मैं सबसे पहले देश की न्यायपालिका और सुप्रीम कोर्ट को बधाई देता हूं। मैं एक गरीब आदिवासी हूं, बस्तर की आवाज हूं और बस्तर के जल-जंगल-जमीन के मुद्दे उठाता रहा हूं। न्याय व्यवस्था पर मेरा भरोसा और मजबूत हुआ है।

मैं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज, चरणदास महंत, टीएस सिंहदेव और पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं का धन्यवाद करता हूं। पूरी उम्मीद है कि आने वाले समय में दूध का दूध और पानी का पानी होगा।

कवासी ने आगे कहा कि जेल में रहते हुए मैंने देखा कि छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने टीवी और अखबारों में खुले तौर पर मेरे समर्थन में बयान दिया। इसके लिए मैं उनका दिल से धन्यवाद करता हूं। मैं जब तक रहूंगा, बस्तर के जल-जंगल-जमीन की लड़ाई लड़ता रहूंगा।

लखमा की रिहाई पर भाजपा ने कहा कि कवासी लखमा आज जमानत पर रिहा हुए। ना दीपक बैज, ना भूपेश बघेल, न चरणदास महंत, ना टीएस बाबा कोई जेल रिसीव करने नहीं पहुंचा। हर किसी का जलवा बिट्टू जी जैसा कहां?

पहले देखिए ये तस्वीरें-

कांग्रेस नेता गिरीश देवांगन से गले मिलते हुए लखमा।

कांग्रेस नेता गिरीश देवांगन से गले मिलते हुए लखमा।

कार्यकर्ताओं संग गाड़ी की बोनट पर सवार होकर अभिवादन किया।

कार्यकर्ताओं संग गाड़ी की बोनट पर सवार होकर अभिवादन किया।

इस दौरान जेल रोड पर लंबा जाम लग गया। एक एंबुलेंस भी फंसी रही।

इस दौरान जेल रोड पर लंबा जाम लग गया। एक एंबुलेंस भी फंसी रही।

पत्नी बोलीं- रिहाई कब होगी सोच-सोच कर वे दुबली हो गई

इस बीच कवासी लखमा की पत्नी बुधरी ने दैनिक भास्कर से बातचीत की। उन्होंने कहा कि पति की रिहाई कब होगी सोच-सोच कर वे दुबली-पतली हो गईं। खाना-पीना कम हो गया था। आज अच्छा लग रहा है।

दरअसल, छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) से जुड़े मामलों में उनकी अंतरिम जमानत मंजूर की गई है।

हालांकि, जमानत की शर्तों के तहत लखमा को छत्तीसगढ़ से बाहर रहना होगा, हालांकि कोर्ट में पेशी के दौरान वे छत्तीसगढ़ आ सकेंगे। इसके अलावा उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करना होगा और अपना वर्तमान पता और मोबाइल नंबर संबंधित पुलिस थाने में दर्ज कराना अनिवार्य होगा।

ED ने कवासी लखमा को 15 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया था। ED ने रिमांड पर उनसे 7 दिन पूछताछ की थी। इसके बाद 21 जनवरी से 4 फरवरी तक न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया था। उसके बाद से ही कवासी लखमा रायपुर सेंट्रल जेल में बंद थे।

लखमा की पत्नी ने कहा- अब अच्छा लग रहा है।

लखमा की पत्नी ने कहा- अब अच्छा लग रहा है।

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सुप्रीम कोर्ट ने ED को लगाई थी फटकार

3 महीने पहले सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को कड़ी फटकार लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने ED से पूछा कि ऐसी कौन-सी जांच बची है, जो अभी तक पूरी नहीं हो पाई है। इस जांच को पूरा करने के लिए कितने समय की जरूरत है।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान ED से पूछा कि एक तरफ कहते हो कि शराब घोटाले के आरोपियों को बेल नहीं देनी है, दूसरी तरफ कहते हो कि हम जांच कर रहे हैं। तो ऐसी कौन-सी जांच है, जो अभी तक चल रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने ED को आदेश दिया है कि जांच अधिकारी अपना पर्सनल एफिडेविट दाखिल करें, जिसमें यह स्पष्ट किया जाए कि पूर्व मंत्री कवासी लखमा के खिलाफ अभी कौन-सी जांच चल रही है। इस जांच को पूरा करने के लिए कितने समय की जरूरत है।

जिला मुख्यालय बीजापुर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मनाई खुशी।

जिला मुख्यालय बीजापुर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मनाई खुशी।

अब जानिए क्यों हुई लखमा की गिरफ्तारी

ED का आरोप है कि पूर्व मंत्री और मौजूदा विधायक कवासी लखमा सिंडिकेट के अहम हिस्सा थे। लखमा के निर्देश पर ही सिंडिकेट काम करता था। इनसे शराब सिंडिकेट को मदद मिलती थी। वहीं, शराब नीति बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कवासी लखमा के इशारे पर छत्तीसगढ़ में FL-10 लाइसेंस की शुरुआत हुई। ED का दावा है कि लखमा को आबकारी विभाग में हो रही गड़बड़ियों की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने उसे रोकने के लिए कुछ नहीं किया।

ये तस्वीर कवासी लखमा की गिरफ्तारी के समय की है।

ये तस्वीर कवासी लखमा की गिरफ्तारी के समय की है।

कमीशन के पैसे से बेटे का घर बना, कांग्रेस भवन निर्माण भी

ED के वकील सौरभ पांडेय ने कोर्ट में बताया था कि 3 साल शराब घोटाला चला। लखमा को हर महीने 2 करोड़ रुपए मिलते थे। इस दौरान 36 महीने में लखमा को 72 करोड़ रुपए मिले। ये राशि उनके बेटे हरीश कवासी के घर के निर्माण और कांग्रेस भवन सुकमा के निर्माण में लगे।

ED ने कहा था कि छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले से सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ है। शराब सिंडिकेट के लोगों की जेबों में 2,100 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध कमाई भरी गई। नेता, कारोबारी और अधिकारियों ने जमकर अवैध कमाई की।

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जानिए क्या है छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED जांच कर रही है। ED ने ACB में FIR दर्ज कराई है। दर्ज FIR में 2 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है। ED ने अपनी जांच में पाया कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया था।

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A, B और C कैटेगरी में बांटकर किया गया घोटाला

A: डिस्टलरी संचालकों से कमीशन

2019 में डिस्टलरी संचालकों से प्रति पेटी 75 रुपए और बाद के सालों में 100 रुपए कमीशन लिया जाता था। कमीशन को देने में डिस्टलरी संचालकों को नुकसान ना हो, इसलिए नए टेंडर में शराब की कीमतों को बढ़ाया गया। साथ ही फर्म में सामान खरीदी करने के लिए ओवर बिलिंग करने की राहत दी गई।

B: नकली होलोग्राम वाली शराब को सरकारी दुकानों से बिकवाना

डिस्टलरी मालिक से ज्यादा शराब बनवाई। नकली होलोग्राम लगाकर सरकारी दुकानों से बिक्री करवाई गई। नकली होलोग्राम मिलने में आसानी हो, इसलिए एपी त्रिपाठी के माध्यम से होलोग्राम सप्लायर विधु गुप्ता को तैयार किया गया। होलोग्राम के साथ ही शराब की खाली बोतल की जरूरत थी।

खाली बोतल डिस्टलरी पहुंचाने की जिम्मेदारी अरविंद सिंह और उसके भतीजे अमित सिंह को दी गई। खाली बोतल पहुंचाने के अलावा अरविंद सिंह और अमित सिंह को नकली होलोग्राम वाली शराब के परिवहन की जिम्मेदारी भी मिली।

सिंडिकेट में दुकान में काम करने वाले और आबकारी अधिकारियों को शामिल करने की जिम्मेदारी एपी त्रिपाठी को सिंडिकेट के कोर ग्रुप के सदस्यों ने दी।

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शराब बेचने के लिए प्रदेश के 15 जिले शॉर्ट लिस्टेड किए गए

शराब बेचने के लिए प्रदेश के 15 जिलों को चुना गया। शराब खपाने का रिकॉर्ड सरकारी कागजों में ना चढ़ाने की नसीहत दुकान संचालकों को दी गई। डुप्लीकेट होलोग्राम वाली शराब बिना शुल्क अदा किए दुकानों तक पहुंचाई गई। इसकी एमआरपी सिंडिकेट के सदस्यों ने शुरुआत में प्रति पेटी 2880 रुपए रखी थी। इनकी खपत शुरू हुई, तो सिंडिकेट के सदस्यों ने इसकी कीमत 3840 रुपए कर दी।

डिस्टलरी मालिकों को शराब सप्लाई करने पर शुरुआत में प्रति पेटी 560 रुपए दिया जाता था, जो बाद में 600 रुपए कर दिया गया था। ACB को जांच के दौरान साक्ष्य मिला है कि सिंडिकेट के सदस्यों ने दुकान कर्मचारियों और आबकारी अधिकारियों की मिलीभगत से 40 लाख पेटी से अधिकारी शराब बेची है।

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C: डिस्टलरीज की सप्लाई एरिया को कम/ज्यादा कर अवैध धन उगाही करना

देशी शराब को CSMCL के दुकानों से बिक्री करने के लिए डिस्टलरीज के सप्लाई एरिया को सिंडिकेट ने 8 जोन में विभाजित किया। इन 8 जोन में हर डिस्टलरी का जोन निर्धारित होता था। 2019 में सिंडिकेट की ओर से टेंडर में नई सप्लाई जोन का निर्धारण प्रतिवर्ष कमीशन के आधार पर किया जाने लगा।

एपी त्रिपाठी ने सिंडिकेट को शराब बिक्री का जोन अनुसार विश्लेषण मुहैया कराया था, ताकि क्षेत्र को कम-ज्यादा करके पैसा वसूल किया जा सके। इस प्रक्रिया को करके सिंडिकेट डिस्टलरी से कमीशन लेने लगा। EOW के अधिकारियों को जांच के दौरान साक्ष्य मिले हैं कि तीन वित्तीय वर्ष में देशी शराब की सप्लाई के लिए डिस्टलरीज ने 52 करोड़ रुपए पार्ट C के तौर पर सिंडिकेट को दिया है।

………………………………

छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…

शराब घोटाला…लखमा की जांच में देरी पर सवाल:SC ने ED से पूछा- कवासी के खिलाफ कौन सी जांच बाकी, इन्वेस्टिगेशन अफसर एफिडेविट में बताए

शराब घोटाला केस में सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को कड़ी फटकार लगाई है।

शराब घोटाला केस में सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को कड़ी फटकार लगाई है।

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला केस में सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को कड़ी फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने ED से पूछा कि ऐसी कौन-सी जांच बची है, जो अभी तक पूरी नहीं हो पाई है। इस जांच को पूरा करने के लिए कितने समय की जरूरत है। पढ़ें पूरी खबर…



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