बीजापुर जिले के आवापल्ली स्थित पोटाकेबिन चिंताकोंटा में अध्ययनरत छात्रा मनीषा सेमला की मौत के मामले में प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने सख्त रुख अपनाया है। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए 7 सदस्यीय जांच दल का गठन किया गया है।
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इस जांच दल की जिम्मेदारी कमलेश कारम, पूर्व उपाध्यक्ष जिला पंचायत को संयोजक के रूप में सौंपी गई है। समिति छात्रा की मौत के कारणों, उपचार में संभावित लापरवाही और प्रशासनिक स्तर पर हुई चूक की जांच करेगी।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इस घटना ने पोटा केबिन आश्रम व्यवस्था और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भी पोटा केबिन में अव्यवस्थाओं की शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों ने समय रहते कार्रवाई नहीं की।

इलाज में लापरवाही का आरोप
जांच दल में संयोजक कमलेश कारम (पूर्व उपाध्यक्ष, जिला पंचायत), सोनू पोटाम (अध्यक्ष, जनपद पंचायत बीजापुर), मनोज अवलम (सदस्य, जनपद पंचायत), अनिता तेलम (सदस्य, जनपद पंचायत), सरस्वती वासम (सदस्य, जनपद पंचायत), रत्ना सोढ़ी (वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री) और राजेश वासम (वरिष्ठ कांग्रेसी) शामिल हैं।
कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि यदि छात्रा को समय पर समुचित चिकित्सा सुविधा मिलती, तो उसकी जान बचाई जा सकती थी। जांच दल जल्द ही पोटा केबिन पहुंचकर संबंधित अधिकारियों, आश्रम प्रबंधन और परिजनों से बातचीत कर आवश्यक तथ्य जुटाएगा।
जिला अस्पताल पहुंचने से पहले हुई थी मौत
दरअसल, सोमवार को आवापल्ली स्थित पोटाकेबिन आश्रम में अध्ययनरत छठवीं कक्षा की छात्रा मनीषा सेमला की तबीयत बिगड़ने पर उसे पहले आवापल्ली अस्पताल ले जाया गया। वहां से हालत गंभीर होने पर उसे बीजापुर जिला अस्पताल रेफर किया गया। हालांकि, जिला अस्पताल पहुंचने के कुछ देर बाद ही छात्रा ने दम तोड़ दिया। पढ़ें पूरी खबर…
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