राज्य बनने के बाद राजधानी के लोगों के लिए सबसे बड़ी राहत की खबर है। पहली बार शहर के अधिकतर इलाकों में बिल्डरों और सरकारी प्रोजेक्ट में बिकने वाले जमीन, मकान, फ्लैट की कीमत एक हो गई है। अभी तक बिल्डरों और सरकारी प्रोजेक्ट के मकानों की कीमत में 50 से 1
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सरकारी योजनाओं में जो फ्लैट 15 से 25 लाख तक में बिकते थे, वही फ्लैट बड़े बिल्डर 25 से 40 लाख तक में बेचते थे। लेकिन अब जमीन की कीमत और संपत्तियों का मूल्यांकन एक ही तरीके से होने की वजह से यह अंतर खत्म हो गया है। वहीं सरकार का दावा है कि ये सभी विसंगतियां खत्म कर दी गई है।
अब बाजार और सरकारी कीमत में कोई अंतर नहीं है। लोग आसानी से अपनी मर्जी से जिससे चाहे उससे संपत्ति खरीद सकते हैं। उन्हें किसी भी तरह का अतिरिक्त खर्चा नहीं करना पड़ेगा। अब बिल्डरों के नए और पुराने प्रोजेक्ट में प्रॉपर्टी खरीदने पर लोगों को यह फायदा होगा।
अफसरों का दावा है कि शहर के 70 वार्डों में पहले 861 जगहों पर प्रॉपर्टी की कीमत तय की जाती थी, लेकिन अब इसे घटाकर 454 कर दिया गया है। उदाहरण के तौर पर वार्ड-1 में 20 कंडिकाएं थीं, जिसे घटाकर 5 कर दिया गया है।
जिले की हर तहसील में सुधारी गई गलती अफसरों ने बताया कि शहर ही नहीं जिले की हर तहसील में जमीन की कीमतों में आई विसंगतियों को दूर कर दिया गया है। जब गाइडलाइन जारी की गई तो सरकारी रेट बाजार रेट से 100 से 200 फीसदी तक बढ़ गई थी। अब इस विसंगति को भी ठीक कर लिया गया है। उदाहरण के तौर पर धरसींवा 6800000 की कीमत तय की गई थी जिसे अब घटाकर 5300000 कर दिया गया है।

पहली बार सड़क के इस पार या उस पार कीमत एक बराबर
नई गाइडलाइन का सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब किसी वार्ड की एक ही सड़क पर एक ही कीमत लागू कर दी गई है। यानी सड़क के इस पार या उस पार या फिर अंदर-बाहर सभी जगहों पर जमीन की कीमत एक कर दी गई है। इससे थोड़ी-थोड़ी दूर पर जो जमीन की कीमत बढ़ जाती थी वो खत्म हो गई है। उदाहरण के तौर पर वार्ड-1 के रिंग रोड-2 में पहले 19,000 और 22,000 रुपए प्रति वर्गमीटर की दो दरें थीं।
अब इसे एक कर दिया गया है। रायपुर-बिलासपुर रोड (वार्ड-4) में 53,000 और 45,000 प्रति वर्गफीट की दो दरें थीं अब एक कीमत हो गई है। जीई. रोड (वार्ड-21, 22 और 23) में 32,000 और 55,000 की दरें थीं अब इन्हें भी एक कर दिया गया है। वार्ड-27 में मुख्य मार्ग पर 1 लाख और 1.20 लाख रुपए की दो दरों को मिलाकर एक दर तय की गई। है वार्ड-12 में 22,000, 32,000 और 33,000 जैसी तीन दरें भी खत्म हो गई हैं।
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