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Home » Fees waived, but lack of coordination with children from wealthy families has led to 9,000 students dropping out of school in the capital in five years. | फीस माफ, पर अमीर घरों के बच्चों से तालमेल नहीं इसलिए 5 साल में राजधानी में 9 हजार ने छोड़ी पढ़ाई – Raipur News
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Fees waived, but lack of coordination with children from wealthy families has led to 9,000 students dropping out of school in the capital in five years. | फीस माफ, पर अमीर घरों के बच्चों से तालमेल नहीं इसलिए 5 साल में राजधानी में 9 हजार ने छोड़ी पढ़ाई – Raipur News

By adminNovember 30, 2025No Comments3 Mins Read
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प्रदेश के प्राइवेट स्कूलों में आरटीई के तहत पढ़ने वाले बच्चों से कॉपी, यूनिफॉर्म, टाई-बेल्ट के नाम पर 10 से 15 हजार रुपए तक की वसूली की जा रही है। सरकार फीस देती है, पर प्राइवेट स्कूल एक्स्ट्रा खर्च मांगते हैं। इसी आर्थिक बोझ के कारण फ्री एजुकेशन लेन

.

स्थिति यह है कि रायपुर में पिछले 5 साल में 9 हजार से ज्यादा बच्चों ने स्कूल छोड़ दिया। जबकि हर साल आरटीई कोटे से 4,500 से 5,000 बच्चों को एडमिशन मिलता है, लेकिन प्रवेश से आधे बच्चों ने शाला त्याग दिया। विभाग को यह भी नहीं पता कि बच्चों ने पढ़ाई क्यों छोड़ी। इसलिए इस साल विभाग ने शाला त्यागी बच्चों के लिए मेंटर नियुक्त करने का फैसला लिया है, जो परिजनों से कारण जानेंगे।

पड़ताल में पता चला कि यूनिफॉर्म और कॉपी-किताब के खर्च से अधिकांश परिजन बच्चों को आगे नहीं पढ़ा पा रहे। ज्यादातर लोग यह खर्च वहन नहीं कर पाते। ऐसे में बच्चे खुद स्कूल छोड़ देते हैं। बच्चों के स्कूल छोड़ने का एक कारण सामाजिक परिवेश में नहीं ढल पाना भी है। दरअसल, इंग्लिश मीडियम स्कूल के बच्चों और आरटीई से प्रवेशित बच्चों के परिवेश में काफी अंतर होता है।

आरटीई में बच्चों को मिलती है यह सुविधा

  • 7 हजार रुपए प्रति वर्ष प्राइमरी क्लास के बच्चों की अधिकतम फीस
  • 11400 रुपए प्रति वर्ष मिडिल के हर छात्र को दिया जाता है
  • 540 रुपए यूनिफार्म के लिए, सामग्री के लिए 250 -450 रु. हर साल
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कमीशन का खेल, हर फीस माफ कर राहत दे सकती है सरकार

भास्कर एक्सपर्ट – बीकेएस रे, शिक्षाविद

निजी प्रकाशक अपनी किताबें बेचने के लिए निजी स्कूलों को कमीशन देती हैं। इसलिए आज हर प्राइवेट स्कूल बाहरी किताबों से पढ़ाई करवाते हैं। इसके लिए वे सभी बच्चों को किताबें लेने कहते हैं। लेकिन, इसका खर्च वे गरीब बच्चे वहन नहीं कर पाते। इसके साथ ही निजी स्कूलों की एक्टिविटीज, उनके यूनिफॉर्म आदि सब काफी महंगे होते हैं। बच्चों के स्कूल छोड़ने का एक कारण यह सब भी देखा जाता है। सरकार चाहे तो यह सभी फीस माफ कर सकती है।

अभी तक नहीं मिले पैसे बीरगांव के सोमेश निषाद ने बताया कि 2023-24 में उनकी बच्ची का आरटीई के तहत आदर्श स्कूल में चयन हुआ था। फीस माफ होने के बावजूद स्कूल ने कॉपी-किताब, ड्रेस, जूते-मोजे और टाई-बेल्ट खरीदने को कहा, जिस पर करीब 10 हजार रुपए खर्च हो गए। ड्रेस के पैसे मिलने की बात कहने पर स्कूल ने फंड आने पर देंगे कहा, लेकिन साल भर बाद भी पैसे नहीं मिले।​​​​​​​

मजबूरी में स्कूल छुड़ाया देवपुरी के हर्रासद बंजारा ने बताया कि उनकी बच्ची न्यू विजन स्कूल में केजी-1 में आरटीई के तहत पढ़ रही है। उनकी नौकरी का ट्रांसफर प्रदेश से बाहर होने पर वे डीईओ ऑफिस यह पूछने गए कि क्या बच्ची का ट्रांसफर उनके गांव के निजी स्कूल में हो सकता है, लेकिन अधिकारियों ने मना कर दिया। वे अब मजबूरन बच्ची की पढ़ाई छुड़ाने की स्थिति में हैं।

आत्मानंद में ए​डमिशन ज्यादा, इसलिए भी कम ^ स्वामी आत्मानंद स्कूल खुलने के बाद ज्यादातर बच्चों ने वहीं प्रवेश ले लिया। इसलिए आरटीई से प्रवेशित बच्चों ने शाला त्याग किया है। इसके अलावा परिजनों का स्थानांतरण, 10 बोर्ड फेल होना, पालकों द्वारा अन्य स्कूलों में प्रवेश कराया जाना, कक्षा पांचवी तक मान्यता प्राप्त स्कूलों में छटवीं न होने से भी बच्चों को ड्रॉपआउट करना पड़ता है।– हिमांशु भारती, डीईओ, रायपुर



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