![]()
रासायनिक उर्वरकों के बढ़ते इस्तेमाल के बीच धमतरी हथबंद के 33 वर्षीय युवा किसान हरेंद्र साहू ने अलग राह चुनी। आज वे किसानों के लिए प्रेरणा बनकर उभरे हैं। साल 2012 में 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अपने पिता के साथ खेती-किसानी का काम शुरू कि
.
उन्होंने गोबर और गोमूत्र से जैविक खाद बनाने की कोशिश की तो उनके परिवार ने ही उनका मजाक उड़ाया। यह कहकर चिढ़ाया जाने लगा कि दिनभर गोबर से सने रहते हैं। उनके शरीर से बदबू आती है। हरेंद्र ने सभी आलोचनाओं को दरकिनार कर अपना प्रयोग जारी रखा। आज वे सैकड़ों किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुके हैं।
हरेंद्र 4.16 हेक्टेयर भूमि पर धान की विभिन्न किस्मों की खेती कर रहे हैं। इनमें सुगंधित धान नगरी दुबराज, देवभोग, तुलसी मंजरी, जंवाफूल और कबीर भोग शामिल हैं। पिछले 7 सालों से वे औषधीय धान रेड राइस और ब्लैक राइस भी उगा रहे हैं।
बाजार में इनकी बहुत डिमांड है। ये उत्पाद न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि दिल्ली, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भी बेचे जा रहे हैं। वे बताते हैं कि दिल्ली में सालाना 10 टन रेड और ब्लैक राइस की खपत है। वे प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए गौ आधारित खाद और जैविक कीटनाशकों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
पारंपरिक विधियों जैसे जीवामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र और ब्रह्मास्त्र की मदद से खुद ही कीटनाशक तैयार कर रहे हैं। इन उपायों से न केवल खेती में लागत कम हो रही है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी अहम कदम है।
उनकी सोच और मेहनत से प्रेरित होकर धमतरी सहित रायपुर, दुर्ग, बालोद और गरियाबंद जिलों के हजार से अधिक किसान उनके उत्पादों का लाभ उठा रहे हैं। वे अब तक 200 से ज्यादा किसानों को प्रशिक्षित भी चुके हैं। इसके अलावा पशुपालन और मशरूम उत्पादन से अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं।
इससे उनका आर्थिक आधार मजबूत हुआ है। बाजार में उनकी जैविक फसल और उत्पादों की मांग बढ़ रही है। अब तो परिवार को भी उन पर गर्व है। हरेंद्र के मुताबिक, प्रति लीटर जैविक खाद तैयार करने में सिर्फ 200 रुपए का खर्च आ रहा है। इससे न केवल कीटों का नाश हो रहा है बल्कि खेतों की उर्वरा शक्ति भी बढ़ रही है।
<
