भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने 12 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के लिए संशोधित कार्यक्रम जारी किया है। आयोग ने पहले घोषित सभी तिथियों को एक सप्ताह बढ़ाकर नया शेड्यूल जारी किया है। इसमें 1 जनवरी 2026 को अर्हक
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वहीं गणना अवधि एक सप्ताह के लिए बढ़ा दी गई है, जो पहले चार दिसंबर तक ही थी। अब 11 दिसंबर 2025 तक BLO घर–घर जाकर गणना फॉर्म (EF) वितरित और संग्रह करेंगे। इसके अलावा 11 दिसंबर 2025 तक जहां आवश्यक होगा, मतदान केंद्रों की पुनर्व्यवस्था की जाएगी।

लंबे समय से गणना फॉर्म भरने और जमा करने की तारीख बढ़ाने की मांग चल रही थी।
12 दिसंबर से 15 दिसंबर 2025 तक डेटा अपडेट कर मसौदा सूची तैयार होगी। ओवरआल बात करें तो छत्तीसगढ़ में EF फॉर्म का डिस्ट्रीब्यूशन लगभग 100% हो गया है। लेकिन उनका डिजिटलीकरण उस रफ्तार से नहीं हो पा रहा है। इस तरह 12 राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेश में छत्तीसगढ़ 8वें पोजिशन पर है। 29 नवंबर तक मिले डेटा के अनुसार।
14 फरवरी को जारी की जाएगी अंतिम वोटर लिस्ट
16 दिसंबर 2025 तक जनता ड्राफ्ट लिस्ट की जांच कर सकेगी। 15 जनवरी 2026 तक नाम छूटने/गलत होने पर सुधार हेतु आवेदन का समय दिया जाएगा। वहीं 16 दिसंबर 2025 से 7 फरवरी 2026 तक दावों–आपत्तियों का निपटान ERO/AERO की ओर किया जाएगा।
10 फरवरी 2026 तक ECI डेटा की गुणवत्ता की जांच करेगा। और 14 फरवरी 2026 अंतिम वोटर लिस्ट जारी कर दी जाएगी। यानी ECI ने सभी ECI ने सभी डेट्स एक सप्ताह तक आगे बढ़ाई है।

2003 की वोटर लिस्ट में नाम नहीं तो चिंता न करें
छत्तीसगढ़ में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर मतदाताओं के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या 2003 की वोटर लिस्ट में नाम होना ही अनिवार्य है? कलेक्टर गौरव सिंह ने ये स्पष्ट किया है कि 2003 की सूची में नाम न होने पर भी आपका वोट नहीं कटेगा।
सिर्फ वर्तमान वोटर आईडी के आधार पर SIR फॉर्म भरना ही काफी है।

आप को SIR फॉर्म भरने पर मुश्किल होने पर अपने BLO से संपर्क करें।
नाम जोड़ने के लिए तीन कैटेगरी है
कई लोग भ्रम में थे कि SIR फॉर्म तभी वैलिड होगा जब 2003 की सूची में उनका या उनके परिवार का नाम हो। कलेक्टर गौरव सिंह के अनुसार ऐसा बिल्कुल नहीं है। उन्होंने बताया है कि तीन तरह की कैटेगरी 1. 2003 के वोटर लिस्ट में नाम है। 2. जिनके पेरेंट्स यानी माता-पिता का नाम नहीं मिल रहा।
लेकिन ग्रैंड पेरेंट्स का नाम मिल रहा तो भी काम चलेग। अपने दादा-दादी, नाना-नानी किसी का भी नाम 2003 की लिस्ट में है, तो फॉर्म में उसका विवरण दर्ज करें और खुद को उससे लिंक करें।
3. किसी का नाम वोटर लिस्ट में नाम नहीं मिल रहा है। ऐसे केस में भी चिंता की जरूरत नहीं है। आप अपने वर्तमान वोटर आईडी के आधार पर फॉर्म भर दें। फॉर्म जमा होने के बाद जब नई मतदाता सूची प्रकाशित होगी, तो आपका नाम उसमें मौजूद रहेगा।
नोटिस के बाद सत्यापन और दस्तावेज जमा करना होगा, नाम जुड़ जाएगा
लेकिन इसके लिए तो जिलास्तर पर एक और प्रक्रिया अपनाई जाएगी:
- जिला चुनाव कार्यालय आपको नोटिस भेजेगा।
- आपको सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा।
- यहां आपको आधार कार्ड+12 में से कोई एक वैध दस्तावेज देना होगा।
- सत्यापन के बाद आपका नाम सुरक्षित रूप से मतदाता सूची में रखा जाएगा।

विवाहित महिलाओं के लिए भी गाइडलाइन
कई विवाहित महिलाओं को यह समझ नहीं आ रहा था कि फॉर्म में शादी से पहले का विवरण भरें या शादी के बाद का। चुनाव आयोग ने इस पर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
- यदि 2003 की सूची में महिला का नाम है, तो राइट साइड वाले कॉलम में अपना विवरण भरें।
- यदि 2003 की सूची में नाम नहीं है, तो लेफ्ट साइड में माता-पिता/दादा-दादी/नाना-नानी का नाम भरकर खुद को लिंक करें।

वैद्य दस्तावेज होने पर सत्यापन के बाद आपका नाम जुड़ जाएगा। परेशान होने की जरूरत नहीं।
यदि 2003 की सूची में किसी का नाम नहीं, फिर भी फॉर्म भरें
चुनाव आयोग के अनुसार यदि—
- आपका नाम वर्तमान मतदाता सूची में है
- पर 2003 की SIR सूची में आप, आपके माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी — किसी का भी नाम नहीं है फिर भी आपको फॉर्म भरना जरूरी है। इसके बाद नोटिस, सुनवाई और दस्तावेज़ सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी और आपका नाम बिना किसी डर के मतदाता सूची में बना रहेगा।
छत्तीसगढ़ में दो करोड़ से अधिक मतदाता
बाकी राज्यों के मुकाबले छत्तीसगढ़ की स्थिति पर बात करें तो प्रदेश SIR के मामले पर अभी आठवें पोजिशन पर है। प्वाइंटस टेबल के लिए EC ने तीन मुख्य पैरामीटर तय किए हैं— 1. मतदाताओं की संख्या, फॉर्म के वितरण का प्रतिशत, 3. EF के डिजिटलीकरण का प्रतिशत
इन तीन प्वाइंट के आधार पर बात करें तो पश्चिम बंगाल (7.6 करोड़), राजस्थान (5.4 करोड़), मध्यप्रदेश (5.7 करोड़), तमिलनाडु (6.4 करोड़) इन बड़े राज्यों की तुलना में छत्तीसगढ़ के मतदाता 2,12,30,737 के लगभग हैं। यानी मतदाता संख्या दूसरे राज्यों की अपेक्षा कम है।

BLO/BLAs की संख्या भी कम है
वहीं BLO/BLAs की संख्या पर बात करें तो तमिलनाडु में 3,14,539, पश्चिम बंगाल में 2,43,924, मध्य प्रदेश में 1,99,581, और राजस्थान में 1,54,959 हैं। वहीं छत्तीसगढ़ में कुल BLO+BLA की संख्या 63,217 है। जोकि मतदाता कम हैं, BLO/BLAs का नेटवर्क भी उसी अनुरूप छोटा है।

छत्तीसगढ़ में लगभग 871 वोटर्स पर एक BLO और 546 वोटर पर औसतन एक BLA है।
EF वितरण में छत्तीसगढ़ ने किया शानदार काम
फॉर्म वितरण की बात करें तो छत्तीसगढ़ में अब 99.61% फॉर्म बट चुके हैं। लेकिन समस्या ये है कि फॉर्म वापस नहीं आ रहे हैं। वहीं दूसरे राज्यों/केन्द्रशासित प्रदेश की बात करें तो
- लक्षद्वीप: 100%
- गोवा: 100%
- गुजरात: 99.82%
- पश्चिम बंगाल: 99.85%
- राजस्थान: 99.78%
- तमिलनाडु: 98.34%
- पुडुचेरी: 98.39% में EF फॉर्म बांटे जा चुके हैं। इस लिहाज से देखा जाए तो छत्तीसगढ़ EF वितरण में टॉप परफॉर्मर राज्यों की श्रेणी में शामिल है( लगभग 100% वितरण पूरा, यानी BLO टीम मैदान में बहुत सक्रिय रही है।
- गणना फॉर्म बांटने के मामले प्रदेश के BLO ने शानदार काम किया है।
EF के डिजिटलीकरण में छत्तीसगढ़ पिछड़ रहा है
EF का डिजिटलीकरण सबसे महत्वपूर्ण कॉलम है, क्योंकि डिजिटल एंट्री जितनी तेज़ होगी, SIR प्रोसेस उतना समय पर पूरा होगा। विभिन्न राज्यों से तुलना करें तो
- लक्षद्वीप – 100% (सर्वश्रेष्ठ)
- गोवा – 95.17%
- राजस्थान – 92.66%
- पश्चिम बंगाल – 91.77%
- मध्य प्रदेश – 89.90%
- पुडुचेरी – 87.87%
- गुजरात – 85.02%
- छत्तीसगढ़ – 83.55%
- तमिलनाडु – 81.48% (सबसे कम) में पूरा हो पाया है।
इस लिहाज से देखा जाए तो ईएफ वितरण में शानदार प्रदर्शन के बावजूद डिजिटलीकरण में छत्तीसगढ़ पीछे है। 9 राज्यों में से छत्तीसगढ़ आठवें नंबर पर आता है।

डेटा पर गौर किया जाए तो फॉर्म दे दिए गए हैं, लेकिन उनकी ऑनलाइन एंट्री तेजी से नहीं हो रही है।
आखिर में समझिए क्या है SIR? और क्यों जरूरी?
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) चुनाव आयोग की ओर से किया जाने वाला सबसे व्यापक और सटीक वोटर वेरिफिकेशन अभियान है। इसके तहत घर-घर जाकर जांच, पुराने रिकॉर्ड का मिलान, डुप्लीकेट/अनुपयोगी एंट्री हटाना, ऑनलाइन और ऑफलाइन सबमिशन की समीक्षा करना है।
ECI यह प्रक्रिया तब करता है जब उसे लगता है कि सिर्फ वार्षिक समरी रिवीजन से मतदाता सूची को पूरी तरह अपडेट नहीं किया जा सकता।

शिकायत या सहायता कहां से लें?
हेल्पलाइन 1950 पर कॉल करें। अपने बीएलओ या जिला चुनाव कार्यालय सेसंपर्क करें।
बिहार की मतदाता सूची दस्तावेजों में क्यों जोड़ी गई? यदि कोई व्यक्ति 12 राज्यों में से किसी एक में अपना नाम मतदाता सूची में शामिल करवाना चाहता है और वह बिहार की एसआईआर के बाद की सूचीका अंश प्रस्तुत करता है, जिसमें उसके माता-पिता के नाम हैं, तो उसे नागरिकता के अतिरिक्त प्रमाण प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं होगी। सिर्फ जन्मतिथि का प्रमाण देना पर्याप्त होगा।
क्या आधार को पहचान के प्रमाण के रूप में मान्यता दी गई है? सितंबर में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद चुनाव आयोग ने बिहार के चुनावअधिकारियों को निर्देश दिया था कि आधार कार्ड को मतदाताओं की पहचानस्थापित करने के लिए एक अतिरिक्त दस्तावेज के रूप में स्वीकार कियाजाए।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि आधार केवल पहचान प्रमाण के रूप मेंस्वीकार किया जाएगा, नागरिकता प्रमाण के रूप में नहीं।
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