बृजमोहन अग्रवाल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर निर्णय को स्थगित करने की मांग की है। फाइल
छत्तीसगढ़ में जारी नई कलेक्टर गाइडलाइंस के बाद जमीन की कीमतों में 5 से 9 गुना तक की बढ़ोतरी हो गई है। अचानक बढ़े दरों से जमीन कारोबारियों में भारी नाराजगी है। कई जिलों में व्यापारी विरोध दर्ज करा रहे हैं और इसे जल्द वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
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इस बीच रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने भी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर निर्णय को तत्काल स्थगित करने की मांग की है। उन्होंने लिखा कि नई गाइडलाइन से जमीन खरीद-फरोख्त ठप हो जाएगी और आम लोगों पर बड़ा आर्थिक बोझ पड़ेगा।
कांग्रेस के संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने जो बात पत्र में लिखी है, वही बात आज छत्तीसगढ़ का हर व्यक्ति कह रहा है। लेकिन मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि जमीन दरों में इतनी बेतहाशा वृद्धि आखिर किस सोच के तहत की गई है। सरकार की हठ और एक मंत्री की जिद के कारण पूरे प्रदेश के रियल एस्टेट सेक्टर को तबाह करने की साजिश की जा रही है।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने सीएम को पत्र लिखा।
बिना जन-परामर्श बढ़ी दरें, जनता पर बढ़ा आर्थिक बोझ
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि बिना जन-परामर्श और बिना वास्तविक मूल्यांकन के की गई यह वृद्धि किसान, व्यापारी, मध्यमवर्ग सहित अलग-अलग वर्गों पर आर्थिक बोझ डाल रही है। उन्होंने लाभांडी और निमोरा जैसे गांवों में क्रमशः 725% और 888% तक बढ़ी दरों के उदाहरण देते हुए इसे जनविरोधी निर्णय बताया।
भूमि अधिग्रहण में अधिक मुआवजे का दावा भ्रामक
बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि नवा रायपुर के ग्रामीण क्षेत्रों को बिना आवश्यक सुविधाएं विकसित किए नगरीय क्षेत्र में शामिल करना भी अनुचित है। उन्होंने दावा किया कि गाइडलाइन वृद्धि से भूमि अधिग्रहण में अधिक मुआवजा मिलने की बात भ्रामक है, क्योंकि इससे केवल 1% किसानों को फायदा होगा।
नई गाइडलाइन स्थगित कर पुरानी बहाल करने की मांग
जबकि 99% जनता पर भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा। उन्होंने पंजीयन शुल्क 4% से घटाकर 0.8% करने की भी मांग की है। इसके अलावा सांसद ने सीएम से 20 नवंबर 2025 को लागू नई गाइडलाइन को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर पुरानी गाइडलाइन बहाल करने और स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति से वास्तविक बाजार मूल्यांकन कराने की मांग की है।
पिछली सरकार ने 30% छूट दी थी, वो अब खत्म
बता दें कि पहले सरकार जमीन का मूल्य (बाजार मूल्य) निकालते समय 30% कम कर देती थी। उदाहरण के तौर पर अगर किसी जमीन का बाजार मूल्य 10 लाख है, तो रजिस्ट्री के समय इसे 30% कम कर दिया जाता था। यानी 10 लाख का सिर्फ 70% (7 लाख) माना जाता था।
इसी कम किए गए मूल्य पर जमीन पर 4% और 75 लाख तक के मकानों पर 2% पंजीयन शुल्क लिया जाता था। अब सरकार ने 30% की छूट खत्म कर दी है। जमीन/मकान का पूरा 100% मूल्य ही गिना जाएगा, लेकिन पंजीयन ड्यूटी (4% और 2%) अभी भी वही रखी है, कम नहीं की गई।
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छत्तीसगढ़ में नई कलेक्टर गाइडलाइंस की वजह से जमीन की कीमतें 5-9 गुना बढ़ गई हैं। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई और अंबिकापुर समेत कई जिलों में रियल एस्टेट कारोबारियों ने कीमतों का विरोध किया है। जिस जमीन की कीमत पहले 10 लाख रुपए थी, वह अब 70 लाख रुपए हो गई है। पढ़ें पूरी खबर…
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