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Home » Chhattisgarh High Court Nullifies Family Court Order on Electronic Evidence
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Chhattisgarh High Court Nullifies Family Court Order on Electronic Evidence

By adminJanuary 27, 2026No Comments4 Mins Read
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बेडरूम में सीसीटीवी कैमरा लगाए जाने का मामला हाईकोर्ट पहुंचा है। (प्रतिकात्मक फोटो)

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में पत्नी का आरोप है कि पति उनके बेडरूम में सीसीटीवी कैमरा लगवाकर उस पर नजर रखता था। वहीं, पति का आरोप है कि पत्नी अन्य पुरुषों के साथ अश्लील चैटिंग और न्यूड वीडियो कॉल करती है। इससे परेशान पत्नी ने तमनार थाने में पति के खिलाफ

.

यह घटना 6 साल पुरानी है। पहले ये मामला पहले फैमिली कोर्ट में था, अब हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। पति ने पत्नी से तलाक के लिए हाईकोर्ट में अपने आरोपों को साबित करने के लिए कमरे में लगे CCTV के फुटेज पेश किए है, जिसे फैमिली कोर्ट ने मानने से इनकार कर दिया था, लेकिन हाईकोर्ट ने इस पर दोबारा सुनवाई का आदेश दिया है।

सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने को लेकर पति पत्नी के बीच विवाद बढ़ गया। (प्रतीकात्मक फोटो)

सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने को लेकर पति पत्नी के बीच विवाद बढ़ गया। (प्रतीकात्मक फोटो)

अब जानिए पूरा मामला

तमनार थाने में दर्ज शिकायत के मुताबिक, महासमुंद की रहने वाली एक महिला की शादी रायगढ़ निवासी टिकेश्वर पंडा के साथ साल 2012 में हुई थी। पति जिंदल पावर तमनार में कर्मचारी था इसलिए वह शादी के कुछ दिनों बाद ही वह ससुराल से पति के साथ लौटकर तमनार में रहने लगी।

महिला का आरोप है कि तमनार आने के बाद पति ने अतिरिक्त रुपयों की डिमांड शुरू कर दी और उत्पीड़न शुरू किया। इतना ही नहीं पति ने पत्नी पर नजर रखने के लिए कमरे में चुपचाप सीसीटीवी कैमरा लगवा दिया।

कैमरा लगाने और बेवजह परेशान करने की बात पर पत्नी ने विरोध किया तो पति मारपीट करने लगा। घर से भी निकाल देने की धमकी दी।

नवंबर 2019 को ससुराल और मायके वालों के बीच दोनों को समझाने का प्रयास किया गया। इसके बावजूद पति पत्नी को साथ रखने के लिए राजी नहीं हुआ।

कुछ महीने तक इंतजार करने के बाद पत्नी ने तमनार थाने जाकर उत्पीड़न और कमरे में सीसीटीवी लगवाने की शिकायत दर्ज कराई थी।

पत्नी ने भी पति पर मारपीट और पैसे मांगने का आरोप लगाया है।

पत्नी ने भी पति पर मारपीट और पैसे मांगने का आरोप लगाया है।

पति ने मांगा तलाक, फैमिली कोर्ट ने खारिज की याचिका

पति ने पत्नी पर क्रूरता और आपत्तिजनक आचरण के आरोप लगाते हुए फैमिली कोर्ट तलाक की याचिका लगाई थी। वहीं, पत्नी ने दांपत्य अधिकारों की बहाली की मांग की थी।

पति ने आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी अन्य पुरुषों के साथ अश्लील चैटिंग और वीडियो कॉल करती है। इन आरोपों को साबित करने के लिए पति ने बेडरूम में सीसीटीवी कैमरे लगवाए थे और उनकी फुटेज को एक कॉम्पैक्ट डिस्क के रूप में कोर्ट में पेश किया था।

लेकिन महासमुंद के फैमिली कोर्ट ने पति की तलाक की अर्जी खारिज कर दी। कोर्ट ने सीडी को सबूत मानने से यह कहते हुए इनकार कर दिया क्योंकि उसके साथ भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-B का अनिवार्य प्रमाणपत्र नहीं दिया गया था। वहीं, पत्नी की दांपत्य अधिकारों की बहाली की याचिका स्वीकार कर ली थी।

फैमिली कोर्ट के फैसले को पति ने हाईकोर्ट में दी थी चुनौती

पति ने फैमिली कोर्ट के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। मामले पर दिए गए फैसले में हाईकोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट अधिनियम, 1984 की धारा 14 और 20 के तहत फैमिली कोर्ट को यह अधिकार है कि वह विवाद के प्रभावी निपटारे के लिए किसी भी दस्तावेज या साक्ष्य को स्वीकार कर सकती है, भले ही वह साक्ष्य अधिनियम के तहत तकनीकी रूप से पूरी तरह अनुकूल न हो।

पति ने पत्नी से मांगा तलाक। हाईकोर्ट में डिजिटल सबूत पेश किए।

पति ने पत्नी से मांगा तलाक। हाईकोर्ट में डिजिटल सबूत पेश किए।

फैमिली कोर्ट के दोनों आदेश रद्द

हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के दोनों आदेश रद्द कर दिए हैं। सीसीटीवी फुटेज वाली सीडी को रिकॉर्ड पर लेने और उस पर जिरह की अनुमति देने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा दोनों मामलों का नए सिरे से सुनवाई कर जल्द निराकरण के निर्देश भी दिए गए हैं।

हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि मामला चार साल से अधिक समय से लंबित है, इसलिए फैमिली कोर्ट इसे प्राथमिकता के आधार पर निपटाए।

फैमिली कोर्ट दोबारा सुनवाई करेगी

जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच ने कहा है कि फैमिली कोर्ट में मामलों के निपटारे के दौरान सीसीटीवी फुटेज, सीडी या अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को केवल इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता कि उनके साथ भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-बी का प्रमाणपत्र संलग्न नहीं है।

डिवीजन बेंच ने महासमुंद फैमिली कोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए केस की दोबारा सुनवाई करने का आदेश दिया है।

……………….

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