नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। छत्तीसगढ़ में बढ़ती गर्मी अब जानलेवा (Chhattisgarh Heatwave)साबित होने लगी है। राजधानी रायपुर सहित प्रदेश के कई जिलों में तापमान लगातार सामान्य से ऊपर (CG Weather Today)दर्ज किया जा रहा है। शनिवार को रायपुर शहर का अधिकतम तापमान 44.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि माना एयरपोर्ट में पारा 44.5 डिग्री तक पहुंच गया। मौसम विभाग के अनुसार, यह सामान्य तापमान से करीब दो डिग्री अधिक है।

प्रदेश में पिछले 24 घंटों के दौरान गर्मी का असर और तेज हुआ है। राजनांदगांव 46 डिग्री तापमान के साथ प्रदेश का सबसे गर्म जिला रहा। वहीं दुर्ग में भी तापमान 45 डिग्री दर्ज किया गया।
पांच दिनों तक लू चलने की चेतावनी
मौसम केंद्र रायपुर ने चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि अगले पांच दिनों तक रायपुर और मध्य छत्तीसगढ़ के एक-दो इलाकों में तीव्र ग्रीष्म लहर चल सकती है। रविवार को राजधानी में आसमान मुख्य रूप से साफ रहने की संभावना है, जिससे धूप और अधिक तीखी महसूस होगी। दोपहर में तापमान 45 डिग्री तक पहुंच सकता है।
रात के तापमान में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। शाम के समय हवा में नमी का स्तर केवल 13 प्रतिशत दर्ज किया गया, जिससे वातावरण बेहद शुष्क और गर्म बना हुआ है।
जगदलपुर में भी बढ़ी असामान्य गर्मी
बस्तर संभाग का जगदलपुर आमतौर पर अपेक्षाकृत ठंडा क्षेत्र माना जाता है, जहां गर्मियों में तापमान 36 से 38 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। हालांकि इस बार यहां भी गर्मी ने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। शनिवार को जगदलपुर का तापमान 43.1 डिग्री दर्ज किया गया, जो सामान्य से करीब पांच डिग्री अधिक है। वहीं रात के तापमान में भी लगभग तीन डिग्री सेल्सियस की वृद्धि दर्ज की गई।
कई जिलों में तेजी से गिर रहा भूजल स्तर
भीषण गर्मी का असर भूजल स्तर पर भी दिखाई दे रहा है। बेमेतरा में भूजल स्तर 150 फीट तक नीचे चला गया है। कवर्धा में 100 फीट, धमतरी में 66 फीट और दुर्ग में 50 फीट तक गिरावट दर्ज की गई है। लगातार बढ़ती गर्मी और कम होती नमी ने जल संकट की चिंता बढ़ा दी है।
पाली में हीट स्ट्रोक से चमगादड़ों की मौत
कोरबा जिले के नगर पंचायत पाली में भीषण गर्मी का असर वन्यजीवों पर भी दिखाई देने लगा है। यहां 43 डिग्री तापमान के बीच बड़ी संख्या में चमगादड़ों की मौत हो गई। नौकोनिया तालाब के आसपास पेड़ों पर बसेरा बनाए चमगादड़ तेज गर्मी नहीं झेल पा रहे हैं और नीचे गिरकर दम तोड़ रहे हैं। कुछ चमगादड़ पेड़ों पर उलटे लटके हुए मृत पाए गए।
स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना वन विभाग को दी है। हर साल फरवरी और मार्च में प्रवासी चमगादड़ यहां पहुंचते हैं और तालाब किनारे पेड़ों पर डेरा जमाते हैं। इस बार इनकी संख्या पहले से अधिक बताई जा रही थी।
पर्यावरण प्रेमियों में बढ़ी चिंता
पाली के नौकोनिया तालाब क्षेत्र में चमगादड़ों की बढ़ती संख्या से पर्यावरण और पक्षी प्रेमी उत्साहित थे। सुबह और शाम तालाब के ऊपर उनकी उड़ान लोगों के आकर्षण का केंद्र बनती थी। लेकिन अब लगातार हो रही मौतों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। आसपास के कई गांवों में भी इसी तरह की स्थिति देखने को मिल रही है।
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