लेखक और सीनियर पत्रकार ब्रह्मवीर सिंह के नए उपन्यास ‘प्रत्याघात’ का विमोचन 11 जनवरी 2026, रविवार को नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 में किया जाएगा। इस अवसर पर सुप्रसिद्ध लेखिका चित्रा मुद्गल, प्रसिद्ध कवि पद्मश्री डॉ. सुनील जोगी, लेखक-कवि और हिंदुस्
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‘प्रत्याघात’ ब्रह्मवीर सिंह की चर्चित कृति ‘बुत मरते नहीं’ का दूसरा भाग है। इससे पहले उनका नक्सलवाद पर आधारित उपन्यास ‘दंड का अरण्य’ साहित्यिक जगत काफी चर्चा में रहा। उपन्यास पर अनेकों शोधकार्य हुए हैं, वहीं‘बुत मरते नहीं’ जातिवाद के भेद से उठकर मित्रता के चरम की कहानी है। इस तरह ‘दंड का अरण्य’, ‘बुत मरते नहीं’ और ‘प्रत्याघात’ लेखक की नियमित सशक्त रचनात्मक यात्रा के रूप में देखे जा रहे हैं।

लेखक ने ‘प्रत्याघात’ को “उनके लिए, जो टूटे हैं पर मिटे नहीं हैं” की संवेदनात्मक टैगलाइन के साथ प्रस्तुत किया है। ‘प्रत्याघात’ उपन्यास का मुख्य संदेश हताशा से उपजे मौन और मौन से उपजे प्रतिरोध के बारे में है। यह हताश मनुष्य के फिर से उठ खड़े होने की कहानी बताता है।
ब्राह्मवीर सिंह 25 साल से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में हरिभूमि समाचार पत्र में संपादक, समन्वय के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने कई चर्चित कहानियां भी लिखी हैं, जिनमें ‘उधार की दुल्हन’, ‘लहंगे वाला लड़का’, ‘दशरथ का वनवास’ और ‘प्यार का लास्ट स्टेज’ बेहद चर्चित है। प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित ‘प्रत्याघात’ को साहित्यिक जगत में काफी उत्सुकता से देखा जा रहा है।
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