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आमाबेड़ा के ग्राम बड़ेतेवड़ा में धर्मांतरण को लेकर हुए हिंसक विवाद के बाद इसी तहसील के ग्राम पुसागांव में रविवार को विवाद हो गया। सोमवार को भास्कर की टीम ग्राम पुसागांव पहुंची। गांव के दोनों आंगनबाड़ियों के कार्यकर्ता तथा एक की सहायिका भी धर्मांतरण कर च
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ग्रामीणों का कहना है अगर हमारे बच्चे आंगनबाड़ी गए तो कार्यकर्ता उन्हें बहकाकर धर्म परिवर्तन करा देंगे। इसलिए जब तक ये कार्यकर्ता यहां काम करेंगे या ये वापस अपने मूलधर्म में नहीं लौटते हम अपने बच्चों को आंगनबाड़ी नहीं भेजेंगे।
ग्राम पंचायत उसेली के आश्रित ग्राम पुसागांव में रविवार को आयोजित बैठक में ग्रामीणों ने धर्मांतरण करने वाले परिवारों से मूल धर्म में लौटने कहा। धर्मांतरण करने वाले परिवारों ने इंकार कर दिया तो विवाद बढ़ गया। इसके बाद ग्रामीण धर्मांतरण करने वाले परिवारों के घर पहुंच गए तथा तोड़फोड़ कर दी। भास्कर की टीम सोमवार दोपहर 1 बजे पुसागांव पहुंची तो देखा गांव के दोनों स्कूलपारा तथा ऊपरपारा के आंगनबाड़ी केंद्र में एक भी बच्चे ही नहीं थे।
ऊपरपारा आंगनबाड़ी की कार्यकर्ता सनतारू कुरेटी तथा स्कूलपारा की कार्यकर्ता सोनबती नरेटी धर्मांतरण कर चुकी है। ऊपरपारा आंगनबाड़ी सहायिका सुलोचना ध्रुव भी धर्मांतरण कर चुकी हैं। रविवार को आयोजित गांव की बैठक में दोनों आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तथा सहायिका को भी मूलधर्म में वापस आने कहा गया था लेकिन गांव के अन्य परिवारों के साथ तीनों ने भी इंकार कर दिया था। ग्रामीणो ने दोनों कार्यकर्ता तथा सहायिका को नौकरी छोड़ने कह दिया।
इसके बाद विवाद बढ़ने से ग्रामीणों ने कार्यकर्ताओं के घर सहित गांव के धर्मांतरण करने वाले अन्य परिवारों के घर पहुंच तोड़फोड़ की थी। ग्रामीणों का कहना है आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तथा सहायिका उनके भी बच्चों को बहका देंगे। दावा पांच पांच बच्चों के पहुंचने का पर केंद्र में मिले एक भी नहीं स्कूलपारा आंगनबाड़ी केंद्र सहायिका लताबाई ध्रुवा ने बताया कार्यकर्ता दूसरे गांव गई है।
आंगनबाड़ी में 20 बच्चे हैं, आज पांच ही बच्चे पहुंचे थे। हकीकत में एक भी बच्चे आंगनबाड़ी में नहीं थे। ऊपरपारा आंगनबाड़ी केंद्र में 23 दर्ज संख्या है। यहां कार्यकर्ता व सहायिका ही मिली। इनका भी कहना था 5 बच्चे पहुंचे थे लेकिन मौके पर एक भी नहीं थे।
आंगनबाड़ी सहायिका सुलोचना ध्रुव ने कहा घरो में बच्चो को बुलाने गई थी लेकिन सिर्फ पांच बच्चे पहुंचे थे। ऊपरपारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सनतारू कुरेटी ने कहा वह बचपन से यीशु मसीह को मान रही है। मुझे अच्छा महसूस होता है। इस कारण प्रार्थना भवन जाती हूं।
काफी समय से समझाइश दी जा रही गांव के सुधराम सलाम, गितेश सलाम ने कहा कई साल से हम लोग धर्मांतरण करने वालों को मूल धर्म में लौटने समझाईश दे रहे हैं। सभी लोग एक ही गांव के हैं तो सभी भाईचारा से रहें। गांव के रीति रिवाज अनुसार चलें। गांव के प्रमुखों की बात मानने के लिए तैयार नहीं हैं।
गांव के 95 में से 15 परिवार कर चुके धर्मांतरण गांव पुसागांव में 95 घर हैं। इनमें से 15 धर्मांतरण कर चुके हैं। 25 साल पहले गांव की रमोतीन ध्रुव ने धर्म परिवर्तन किया था। उसके बाद धीरे धीरे कर 15 परिवार धर्मांतरण कर चुके हैं। पहले सभी परिवार हर रविवार आमाबेड़ा प्रार्थना भवन जाते थे।
10 साल पहले गांव के बुधराम सलाम के घर में प्रार्थना करना शुरू किया। पिछले साल से कमलेश ध्रुव के घर हाल में प्रार्थना करने लगे हैं। गांव के कमलेश ध्रुव केरल से प्रशिक्षण लेने के बाद पास्टर बन चुके हैं। यहां ग्राम पुसगांव के अलावा आसपास के गांव से भी प्रार्थना करने धर्मांतरण करने वाले आते हैं।
पुलिस गांव से लौटी, हालात सामान्य दिखे रविवार को गांव में विवाद के बाद माहौल बिगड़ गया था। गांव में पुलिस बल तैनात की गई थी। सोमवार को पुलिस बल गांव से लौट गया। गांव में लोग सामान्य दिनों की तरह कामकाज करते नजर आए।
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