गरियाबंद जिले में पीएम आवास के जियो टैगिंग और प्रगति रिपोर्ट में बड़ी गड़बड़ी सामने आने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। जिला सीईओ प्रखर चंद्राकर के निर्देश पर की गई जांच में छह पंचायतों में फर्जी प्रगति और गलत जियो टैगिंग के मामले पकड़े गए हैं
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मैनपुर जनपद सीईओ श्वेता वर्मा ने जांच रिपोर्ट के आधार पर ग्राम पंचायत खजूरपदर के आवास मित्र नरोत्तम यादव, सरईपानी के धनेश्वर यादव, नवापारा के प्रमोद नागेश, बजाड़ी के दयानंद यादव, मूचबहाल के सत्यवान साहू और धोबनमाल पंचायत के रोजगार सहायक खीरसिंह बघेल को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया है।
तकनीकी सहायकों को नोटिस, जवाबदेही तय
जियो टैगिंग तकनीकी सहायकों के निरीक्षण में होती है। ऐसे में दीपक ध्रुव, अजित ध्रुव और प्रणय कुमार को गड़बड़ी के लिए नोटिस जारी किया गया है। रिपोर्ट में सामने आया कि कई जगह आवास की प्रगति बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई गई, जबकि कुछ मामलों में दूसरे लोगों के मकानों को भी आवास बताकर दर्ज किया गया।

सरपंच–सचिव पर भी कार्रवाई की तैयारी
योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सरपंच और सचिव पर भी होती है। इसलिए जिला सीईओ ने संबंधित पंचायतों के सरपंच और सचिव को शो-कॉज नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो धारा 40 के तहत कार्रवाई की तैयारी है।
जांच टीम रात भर पंचायतों में रही
जिले में हुई गड़बड़ी का खुलासा होने के बाद चार सदस्यीय जांच टीम पद्मिनी हरदेल, बुद्धेश्वर साहू, जितेंद्र पाठक और अजित शर्मा ने देर रात तक गांवों में जाकर जांच रिपोर्ट तैयार की। रिपोर्ट में पाया गया कि मई महीने में आवास प्रगति दिखाने के नाम पर बड़े पैमाने पर गलत एंट्रियां की गई थीं।

बोगस एंट्री का खेल: रैंक बढ़ा, लेकिन आवास नहीं
साल 2025 की शुरुआत में पीएम आवास जिला प्रशासन की पहली प्राथमिकता थी। जिले को कुल 42 हजार आवास मिले थे और इन्हें साल के अंत तक पूरा करना था। मार्च से ही शासन ने प्रगति रिपोर्ट मांगी। अप्रैल से जून तक जियो टैगिंग कर ऐसी प्रगति दिखाई गई कि जिले की रैंक 17वें स्थान से दो पायदान ऊपर पहुंच गई।
आरोप है कि इसी दौरान आवास मित्रों की ओर से कागजों पर प्रगति बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने का खेल चल रहा था। जिला सीईओ बदलने और आईएएस प्रखर चंद्राकर की कमान संभालने के बाद सिस्टम कड़ा हुआ। इसी बीच भास्कर की रिपोर्ट में गड़बड़ी उजागर हुई, जिसके बाद जांच शुरू हुई।
नया प्रयोग: अब पंचायत सचिव देंगे प्रमाणपत्र
गड़बड़ी रोकने के लिए जिला सीईओ ने नया सिस्टम लागू करने की तैयारी की है। अब—
- पंचायत सचिव सीधे आवास की जमीन पर जाकर भौतिक प्रगति की पुष्टि करेंगे
- ऑनलाइन रिकॉर्ड और जमीनी स्थिति का मिलान कर प्रमाणपत्र जारी करेंगे
- यह रिपोर्ट सीधे जिला सीईओ को भेजी जाएगी
पहले पंचायत सचिव इस योजना के लिए प्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार नहीं थे। काम अस्थायी कर्मियों के भरोसे था, जिनके पास जवाबदेही की कमी रहती थी।
सीईओ प्रखर चंद्राकर का बयान
“गड़बड़ी पाए जाने पर 5 पंचायतों के आवास मित्र और एक रोजगार सहायक को सेवा से हटाया गया है। तकनीकी सहायक, सरपंच और सचिव की जवाबदेही भी तय की गई है। यदि उनका जवाब संतोषजनक नहीं मिला, तो सभी पर उचित कार्रवाई की जाएगी।”
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