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ग्राम दाऊकापा में सांवरा जाति के लिए विशेष स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें 142 लोगों ने अपना इलाज कराया। यह शिविर केवल उपचार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि स्वास्थ्य जागरूकता, टीकाकरण और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी भी दी गई।
सांवरा जाति परंपरागत घरेलू उपचार और ओझा-गुणिया पर निर्भर रहती है, जिससे गंभीर बीमारियों में जीवन जोखिम में पड़ जाता है। डॉ. मनीष बंजारा ने कहा कि स्वास्थ्य ही असली संपत्ति है और गंभीर स्थिति में आधुनिक चिकित्सा ही जीवन बचाने का सबसे सुरक्षित साधन है। सर्पदंश, तेज बुखार, संक्रमण, हृदयघात और ब्रेन स्ट्रोक जैसी स्थिति में समय पर अस्पताल पहुंचाना अनिवार्य है। शिविर में महिला, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। उच्च रक्तचाप के 12, मोतियाबिंद के 11, दाद-खाज के 27, सर्दी-खांसी के 17, बॉडी पेन के 14, मधुमेह के 6, कमजोरी के 13, कान के संक्रमण के 6 और कुपोषण के 2 मरीज पाए गए।
गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल जाने की सलाह दी गई। शिविर में मातृ-शिशु स्वास्थ्य परामर्श, टीकाकरण, ब्लड प्रेशर और शुगर जांच, मौसमी बीमारियों और सर्पदंश से बचाव की जानकारी देकर निःशुल्क दवाइयां भी वितरित की गई। परामर्श स्थानीय भाषा और संवेदनशील संवाद के माध्यम से दिया गया, जिससे लोग बिना झिझक अपनी समस्याएं साझा कर सके।
कार्यक्रम के दौरान लोगों को संदेश दिया गया कि हर बीमारी का इलाज केवल टोना-टोटका नहीं होता, सर्पदंश में तुरंत अस्पताल जाना जीवन बचाता है, समय पर टीकाकरण गंभीर बीमारियों को रोक सकता है और सरकारी योजनाएँ समुदाय के हित में बनाई गई हैं। शिविर का आयोजन कलेक्टर कुंदन कुमार, सीएमएचओ डॉ. शीला शाहा के निर्देश और डीपीएम गिरीश कुर्रे, बीएमओ डॉ. कमलेश खैरवार के मार्गदर्शन में किया गया। डॉ. मनीष बंजारा ने उपस्थित लोगों का धन्यवाद करते हुए कहा कि परंपरा का सम्मान करते हुए जीवन की रक्षा के लिए आधुनिक चिकित्सा अपनाने की पहल को स्वीकार करने के लिए आभारी हैं।
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