ग्राम कच्चे में अंतरराष्ट्रीय कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा की श्री शिव महापुराण कथा के पांचवें दिन भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। रविवार होने के कारण श्रद्धालुओं की संख्या में अचानक वृद्धि हुई, जो पिछले दिनों की तुलना में दोगुनी थी।
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तीनों बड़े पंडालों के साथ-साथ श्रद्धालु खुले में पीछे तक बैठे नजर आए। पंडित मिश्रा को सीधे न देख पाने वाले भक्तों ने एलईडी स्क्रीन के माध्यम से कथा का श्रवण किया।
कथा के दौरान पंडित मिश्रा ने भगवान महादेव से संबंधित प्रसंग सुनाए। उन्होंने विशेष रूप से कार्तिकेय और ताड़कासुर के नरसंहार की कहानी का वर्णन किया।

पंडित मिश्रा ने शिवपुराण की कथा सुनने का महत्व बताया
पंडित मिश्रा ने अपने प्रवचन में कहा कि मनुष्य चाहे कितनी भी भौतिक सुख-सुविधाएं प्राप्त कर ले, अंततः उसे इस संसार से जाना ही है। इसलिए, उन्होंने प्रसन्नतापूर्वक जीवन जीने और शिवपुराण की कथा सुनने का महत्व बताया।
उन्होंने बताया कि कार्तिकेय का जन्म छह मुखों के साथ हुआ था और उनका उद्देश्य ताड़कासुर का संहार करना था। ताड़कासुर ने देवताओं को बहुत परेशान कर रखा था और उसने ब्रह्माजी से यह वरदान प्राप्त किया था कि उसकी मृत्यु केवल भगवान शंकर के पुत्र के हाथों ही होगी।

देवताओं के आग्रह पर जब कार्तिकेय ताड़कासुर का वध करने निकले, तो माता पार्वती ने उन्हें रोका। उन्होंने कार्तिकेय को बताया कि ताड़कासुर के हृदय में भगवान शंकर का वास है, इसलिए वहां वार न करें। यह सुनकर कार्तिकेय ने समझदारी से काम लिया और ताड़कासुर का संहार किया।

शिवपुराण की कथा सुनने से दुख होते हैं दूर
पंडित मिश्रा ने समस्याओं के समाधान पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने मच्छर के काटने का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे चादर ओढ़ने से मच्छर से बचाव होता है, वैसे ही जीवन की सभी समस्याओं का हल शिवपुराण की कथा में निहित है। उन्होंने कहा कि शिवपुराण की कथा का श्रवण करने से सभी दुख दूर हो सकते हैं।
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