बिलासपुर समेत प्रदेश के सात बड़े नगर निगमों में संपत्तिकर जमा करने का ऑनलाइन सिस्टम पाँच साल पहले शुरू हो चुका है। इसके बावजूद इन निगमों में अभी भी 50 फीसदी से ज्यादा लोग ऑफलाइन यानी निगम दफ्तर जाकर ही टैक्स का भुगतान कर रहे हैं। वेबसाइट, यूपीआई और ऑन
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यानी अभी भी लोग टैक्स चुकाने ऑनलाइन प्लेटफार्म का उपयोग करने में कतरा रहे हैं। इसकी बड़ी वजह ऑनलाइन के सभी विकल्पों में कुछ न कुछ तकनीकी दिक्कत है। कई बार ऑनलाइन माध्यम में सर्वर की वजह से भुगतान करने में दिक्कत होती है। कई बार टैक्स स्लिप नहीं निकलती। राजधानी रायपुर के नगर निगम में भी यह स्थिति है कि अभी भी बमुश्किल 40 फीसदी लोग ही ऑनलाइन माध्यम से टैक्स अदा कर रहे हैं।
प्रदेश में रायपुर पहला नगर निगम है, जिसने अगस्त 2019 में संपत्तिकर भुगतान की प्रक्रिया को ऑनलाइन किया। संपत्तियों के सर्वे के बाद हर मकान की प्रॉपर्टी आईडी बनाई गई। लोगों की जानकारी ऑनलाइन अपडेट की गई और उसके बाद भुगतान का ऑनलाइन सिस्टम शुरू किया गया। रायपुर के बाद बिलासपुर दूसरा बड़ा शहर है। यहां सवा लाख से ज्यादा संपत्तिकर दाता हैं।
यहां भी ऑनलाइन सिस्टम चालू हुए करीब पाँच साल हो गए। अभी भी बमुश्किल 28 प्रतिशत के आसपास लोग ही ऑनलाइन माध्यम का उपयोग कर रहे हैं। यहां लोगों का कहना है कि संपत्तिकर की रसीद एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। लोगों को सालों से इसकी हार्ड कॉपी संभालकर रखने की आदत है। ऑनलाइन माध्यम में डिजिटल पावती मिलती है। यह गुम हो जाने पर दिक्कत होती है। इसलिए लोग अभी भी निगम दफ्तर जाना पसंद कर रहे हैं।
पिछले साल 95 हजार लोगों ने किया
शुरुआत में ऑनलाइन सिस्टम में काफी दिक्कतें हुईं। ढेरों गड़बड़ियां और दिक्कतों के बाद सिस्टम को सुधारने में पाँच से छह साल लग गए। अब सिस्टम पूरी तरह ठीक है। पिछले साल करीब 95 हजार लोगों ने ही ऑनलाइन भुगतान किया। निगम अफसरों का कहना है कि ऑनलाइन के माध्यम में रायपुर नगर बाकी नगरीय निकायों से आगे है।
यहां अब व्हाट्सएप चैटबॉट की भी सुविधा है। लोग व्हाट्सएप में ही अपने संपत्तिकर की स्थिति जान सकते हैं और वहीं पर भुगतान का भी विकल्प है। इसके अलावा यूपीआई, नेटबैंकिंग समेत अन्य माध्यम भी हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग अभी भी साल के आखिरी दिनों में टैक्स जमा करने के लिए जोन दफ्तर पहुंचते हैं।

ऑनलाइन सिस्टम में ये दिक्कतें
दुर्ग कादंबरी नगर निवासी वेदकुमार शर्मा ने बताया कि दुर्ग नगर निगम ने संपत्तिकर भुगतान का ऑनलाइन सिस्टम अच्छा है, लेकिन भुगतान की रसीद एक बड़ी समस्या है। ऑनलाइन माध्यम से वर्चुअल रिसिप्ट मिल जाती है, लेकिन कागजी रसीद के लिए निगम दफ्तर जाना ही पड़ता है। पावती डाउनलोड की सुविधा नहीं है। इसलिए मैं जोन जाकर ही टैक्स जमा करता हूं।
रायपुर शक्तिनगर के रहने वाले प्रमोद साहू का कहना है कि पिछले साल मैंने चैटबॉट से संपत्तिकर जमा किया, लेकिन पावती ही नहीं मिली। ऑनलाइन चेक किया तो संपत्तिकर बकाया बता रहा था। निगम के इंजीनियर से इसकी शिकायत की तो उन्होंने तकनीकी फॉल्ट बताया। हालांकि उन्होंने बाद में संपत्तिकर भुगतान की पावती डाउनलोड कर दी। इसलिए थोड़ा डर लगता है।
भिलाई नेहरू नगर निवासी यशवंत कुमार चौधरी ने बताया कि बिजली बिल जमा करने का बिजली कंपनी का मोर बिजली एप 100 प्रतिशत सक्सेस है। इसमें तुरंत भुगतान हो जाता है। इसी तरह निगम का भी सिस्टम होना चाहिए। सबसे बड़ी दिक्कत पावती है। हार्ड कॉपी लेने लोगों को निगम जाना ही पड़ता है। इसलिए वहीं जाकर भुगतान करते हैं।
टैक्स भुगतान के लिए ऑनलाइन सिस्टम फायदेमंद है। इसे अधिक सरल और उपयोगी बनाया गया है। इसमें काफी कुछ अपडेट किया गया है। कुछ तकनीकी दिक्कत जैसे पावती इत्यादि के लिए सभी नगरीय निकायों को सिस्टम बनाने कहा गया है, ताकि लोग खुद पावती भी डाउनलोड कर सकें। पुलक भट्टाचार्य, अपर संचालक, नगरीय प्रशासन विभाग
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