गरियाबंद जिले के देवभोग ब्लॉक में लगभग 300 शिक्षकों का 4 करोड़ रुपए का भुगतान कई सालों से लंबित है। यह राशि प्रशासनिक उलझनों के कारण अटकी हुई है। इसमें सवा तीन करोड़ रुपए अंशदायी पेंशन योजना के तहत और लगभग 80 लाख रुपए क्रमोन्नत वेतनमान के मद से मिलने
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इस लंबित भुगतान को लेकर छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक/समग्र शिक्षक देवभोग इकाई के अध्यक्ष अवनीश पात्र के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को जिला पंचायत अध्यक्ष गौरीशंकर कश्यप को ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल में सुनील अग्रवाल, अनिल सिन्हा, रेखराम निधि और बीरेंद्र सोनवानी भी शामिल थे। शिक्षकों ने जल्द से जल्द बकाया भुगतान की मांग की।

गौरीशंकर कश्यप ने दिया समिति गठित करने का आश्वासन
जिला पंचायत अध्यक्ष गौरीशंकर कश्यप ने शिक्षकों की समस्या सुनने के बाद जिला पंचायत सीईओ से चर्चा करने और समाधान के लिए एक समिति गठित करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि सालों से लंबित इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जाएगा और प्राथमिकता के आधार पर इसका समाधान किया जाएगा।
अंशदायी पेंशन योजना मार्च 2013 से लागू हुई थी। इस योजना के तहत शिक्षाकर्मियों के वेतन से 10% और शासन की ओर से 10% नियोक्ता अंश उनके PRAN खाते में जमा होना था। मार्च 2012 से जून 2022 तक शिक्षकों के वेतन से कर्मचारी अंश काट लिया गया था।
हालांकि, संविलियन के बाद भुगतान के समय जिला पंचायत ने नियोक्ता अंश के अभाव का हवाला देते हुए भुगतान रोक दिया। इस दौरान तीन साल में चार सीईओ बदले जा चुके हैं, लेकिन यह मामला अब तक नहीं सुलझ पाया है।

वेतन आबंटन में ही शामिल था नियोक्ता अंश
शिक्षकों के आंदोलन के बाद वर्ष 2023 में शासन ने स्पष्ट कर दिया कि वेतन के आबंटन में ही नियोक्ता अंश का प्रावधान शामिल था। इसके बावजूद जिला पंचायत लगातार जनपद और बीईओ कार्यालय से कर्मचारी-वार विवरण और जमा राशि का ब्योरा मांगता रहा।
इस अवधि में जनपद देवभोग में चार सीईओ और तीन बीईओ बदले गए, लेकिन बार-बार पत्राचार के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो सका और स्थिति जस की तस बनी रही।
60 शिक्षकों से हुई 80 लाख की रिकवरी भी वापस नहीं
प्रभावित 300 शिक्षकों में से 60 ऐसे हैं जिनकी आर्थिक क्षति दोहरी है। साल 1998 से सेवा दे रहे इन शिक्षकों को 2014 में क्रमोन्नत वेतनमान दिया गया, जिसे गलत बताते हुए 2015 में प्रति शिक्षक 1.37 लाख रुपए के हिसाब से करीब 80 लाख की रिकवरी कर ली गई।
बाद में महासमुंद जिला के इसी तरह के एक मामले में 15 मई 2017 को कोर्ट ने रिकवरी को गलत ठहराया और राशि लौटाने का आदेश दिया। अधिकांश जिलों में राशि वापस कर भी दी गई, पर देवभोग में यह रकम तत्कालीन अधिकारियों की मनमानी के कारण अटक गई।
ट्रेजरी में जमा करने के बजाय बीईओ खाते में रख दी गई रकम
रिकवरी की गई राशि को ट्रेजरी में जमा करने के बजाय तत्कालीन बीईओ ने इसे अपने कार्यालय खाते में जमा रखा। वापसी के आदेश तक इस राशि को कई अन्य मदों में खर्च कर दिया गया। जनपद स्तर पर जमा राशि को भी कोरोना काल में सैनिटाइजर, विक्षिप्तों के भोजन और पशु आहार जैसी मदों में खर्च दिखाकर उपयोग कर लिया गया। 80 लाख में से केवल 3 लाख रुपए ही शासन के खाते में वापस जमा हो पाए।
प्रभावित शिक्षकों का कहना है कि वे अब रिकवरी की पूर्ण वापसी नहीं चाहते, बल्कि चाहते हैं कि उचित वेतनमान को मान्य कर उनका वेतन पुनः दर्ज किया जाए। उनका तर्क है कि गलत रिकवरी और वेतन विसंगति के कारण उनका 8वां वेतनमान भी प्रभावित होगा, जिससे भविष्य की सेवा व पेंशन लाभ को नुकसान पहुँचेगा।
प्रशासन का पक्ष
देवनाथ बघेल, बीईओ देवभोग ने बताया कि अंशदायी पेंशन योजना के अंतर्गत 300 से अधिक शिक्षकों का करोड़ों का भुगतान लंबित है। जिला पंचायत की ओर से मांगे जाने पर समय-समय पर सभी जानकारी प्रेषित की गई है। क्रमोन्नत वेतनमान रिकवरी से संबंधित शेष 3 लाख रुपए शासन के मद में जमा कर दिए गए हैं। आगे जैसे भी निर्देश मिलेंगे, उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षकों की उम्मीद-अब तो मिले न्याय
लंबे समय से आर्थिक क्षति झेल रहे शिक्षकों को अब जिला पंचायत अध्यक्ष की ओर से दिए गए आश्वासन से उम्मीद जगी है। शिक्षक संगठन का कहना है कि सालों से लंबित इस समस्या का समाधान न होने से उनका आर्थिक, सामाजिक और मानसिक रूप से भारी नुकसान हुआ है। अब वे उम्मीद कर रहे हैं कि शासन-प्रशासन संवेदनशीलता दिखाते हुए जल्द से जल्द लंबित भुगतान जारी करेगा।
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