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‘यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत:। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥’ श्रीमद्भगवद्गीता का यह श्लोक संदेश देता है कि जब-जब धर्म में गिरावट और अधर्म का विस्तार होता है, तब ईश्वर धर्म की स्थापना के लिए अवतार लेते हैं। गीता का यही सार रायपुर
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यह टीम शहर के घरों, स्कूलों, कॉलोनियों और सामाजिक संस्थानों तक श्रीमद्भगवद्गीता का ज्ञान पहुंचा रही है। टीम-11 की 14 टोलियों में शामिल 154 सदस्य रोजाना रायपुर के अलग-अलग इलाकों में जाकर गीता पाठ, संस्कार, सकारात्मकता और आध्यात्मिक ज्ञान का प्रसार कर रहे हैं।
बच्चों को संस्कार और योग सिखाए जा रहे हैं, युवाओं को दिशा और प्रेरणा दी जा रही है तथा परिवारों में शांति और सद्भाव का वातावरण तैयार किया जा रहा है। शहर के कई स्कूलों में इसके लिए 40 मिनट की विशेष कक्षाएं संचालित हो रही हैं, जबकि 10 सदस्य अपने घरों को ज्ञान केंद्र के रूप में चला रहे हैं।
ऐसे बनी ‘टीम-11’ : गीता परिवार की स्थापना 1986 में स्वामी गोविंददेव गिरि महाराज ने नैतिक मूल्यों से भावी पीढ़ी को सजाने के उद्देश्य से की थी। छत्तीसगढ़ में बीते पांच वर्षों से यह अभियान सक्रिय है। राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष डॉ. संजय मालपाणी के नेतृत्व में इस मिशन को मजबूत करने के लिए ‘टीम-11’ का गठन किया गया।
15 साधकों को गीता कंठस्थ रायपुर गीता परिवार की अध्यक्ष किरण जोशी ने बताया कि गीता परिवार का उद्देश्य केवल प्रवचन नहीं बल्कि अभ्यास-आधारित अध्ययन है। इसी के परिणामस्वरूप 15 गीताव्रतियों को संपूर्ण गीता कंठस्थ है। 22 गीतापथिकों ने 12 अध्याय, 30 से अधिक गीतापाठकों ने 6 अध्याय, और 50 से अधिक गीता जिज्ञासुओं ने 3 अध्याय कंठस्थ किए हैं। हर रविवार निःशुल्क ऑनलाइन परीक्षा ली जाती है और सफल साधकों को प्रमाणपत्र दिया जाता है।
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