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छत्तीसगढ़ में एमएसपी पर अब तक 23 लाख 55 हजार किसानों से धान की खरीदी की जा चुकी है। इसके एवज में किसानों को 29 हजार 315 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है। किसानों को धान का भुगतान 48 घंटे के भीतर किया जा रहा है। वर्तमान में हर दिन तीन लाख टन धान खरीदा जा रहा है। इस साल 27.43 लाख किसानों ने धान बेचने के लिए पंजीयन कराया है। बताया गया है कि आगामी तीन दिनों में डेढ़ लाख किसानों से खरीदी होगी। इसके लिए 70 हजार से अधिक नए टोकन जारी किए जाने की संभावना है। वर्तमान में प्रतिदिन औसतन 22,000 टोकन जारी किए जा रहे हैं, जिससे किसानों को अपनी बारी के अनुसार व्यवस्थित ढंग से धान बेचने का अवसर मिल रहा है। राज्य सरकार ने पिछले साल किसानों से 149.25 लाख टन धान की खरीदी की थी और 34 हजार 500 करोड़ रुपए का भुगतान एमएसपी पर तथा 12 सौ करोड़ का भुगतान अनुदान के रूप में किया गया है। इस तरह पिछले दो साल में धान खरीदी समेत विभिन्न कृषि कल्याण योजनाओं के तहत किसानों को डेढ़ लाख करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है। प्रदेश के 2740 केंद्रों से धान खरीदी की जा रही है। इन केंद्रों में माइक्रो एटीएम की भी व्यवस्था की गई है जिससे किसान तात्कालिक खर्चे के लिए कुछ राशि निकाल सकें। धान खरीदी के साथ धान का उठाव भी किया जा रहा है। केंद्रों में सीसीटीवी के साथ तिरपाल भी : खरीदी केंद्रों में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी रोकने के लिए सीसीटीवी लगाए गए हैं। इसे अलावा सीमावर्ती इलाकों में चेकपोस्ट स्थापित कर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। कांग्रेस के 5 साल के शासन में हुई धान खरीदी 80 लाख टन से बढ़ 130 लाख टन पहुंची खरीदी कांग्रेस शासनकाल में 2018-19 से 2022-23 के बीच 80.38 लाख टन से बढ़कर केवल 107.54 लाख टन तक ही पहुुंच सकी, जो वर्तमान भाजपा शासनकाल की तुलना में काफी कम है। उस समय खरीदी का दायरा व्यापक नहीं था, किसानों को भुगतान प्रक्रिया अपेक्षाकृत धीमी रही और अव्यवस्थाओं के कारण किसानों को वास्तविक लाभ नहीं मिल सका था। लेकिन इस साल अब तक 130 लाख टन की खरीदी की जा चुकी है। इसी तरह कांग्रेस शासनकाल में सूखत 6.32 फीसदी था जबकि भाजपा शासनकाल में यह महत 3.5 फीसदी तक रहा। दूसरी ओर अब तक खरीदे गए 128 लाख टन धान में से 77 लाख टन धान समितियों में रखे हुए हैं। 50 लाख टन धान का परिवहन किया जा चुका है। इस तरह कुल 39 फीसदी धान का उठाव ही हो पाया है। वहीं लिंकिंग के माध्यम से किसानों से पांच हजार करोड़ रुपए की वसूली भी की जा चुकी है। धान खरीदी की पारदर्शिता और अवैध परिवहन को रोकने के लिए नवा रायपुर में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित किया गया है, जो मार्कफेड मुख्यालय में स्थित है। यह सेंटर हाईटेक टेक्नोलॉजी के जरिए राज्य भर में धान उपार्जन प्रक्रिया की चौबीस घंटे सातों दिन मॉनिटरिंग करता है। बिचौलियों की भूमिका खत्म हुई: साय ^राज्य सरकार द्वारा अपनाई गई डिजिटल और समयबद्ध प्रणाली से किसानों में खासा उत्साह दिख रहा है। बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है। किसानों को समय पर भुगतान हो रहा है। आगामी तीन दिनों में 1.5 लाख किसान धान बेचने सोसायटी में पहुंचने वाले हैं। इसके लिए प्रशासन द्वारा सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। -विष्णुदेव साय, मुख्यमंत्री
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