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छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में उद्योगों में होने वाले हादसों को कम करने और कर्मचारियों की सुरक्षा बढ़ाने के उद्देश्य से लगातार वर्कशॉप और मॉक ड्रिल आयोजित की जा रही हैं। औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग की ओर से विभिन्न प्लांटों के प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मॉक ड्रिल के जरिए आगजनी और अन्य औद्योगिक दुर्घटनाओं से बचाव की जानकारी दी जा रही है। एनआर इस्पात प्लांट में हुई फायर बेस्ड मॉक ड्रिल एनआर इस्पात एंड प्राइवेट लिमिटेड कारखाना परिसर में फायर बेस्ड मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इस दौरान आग लगने की स्थिति में उसे नियंत्रित करने, जानमाल की सुरक्षा करने और अलग-अलग परिस्थितियों में उपयोग होने वाले अग्निशामक यंत्रों की जानकारी दी गई। प्रतिनिधियों को यह भी बताया गया कि आपातकालीन स्थिति में किस तरह त्वरित प्रतिक्रिया देकर बड़े हादसे को रोका जा सकता है। MSP स्टील में सुरक्षा वर्कशॉप का आयोजन वहीं एमएसपी स्टील में सुरक्षा वर्कशॉप और नॉलेज शेयरिंग सेशन आयोजित किया गया। कार्यक्रम में 10 बड़े कारखानों के करीब 50 प्रतिनिधि शामिल हुए। इसमें उद्योगों के बीच तालमेल और सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने पर चर्चा की गई। म्यूचुअल एड सिस्टम पर दिया गया जोर राजेश पटेल ने म्यूचुअल एड सिस्टम के तहत उद्योगों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि कारखानों को एक-दूसरे के साथ मिलकर दुर्घटनाओं को कम करने और सुरक्षा उपायों को मजबूत करने की दिशा में काम करना चाहिए। स्पंज आयरन और स्टील मेकिंग पर प्रेजेंटेशन वर्कशॉप के दौरान कारखाना प्रतिनिधियों ने स्पंज आयरन और स्टील मेकिंग में अपनाई जाने वाली मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) पर भी प्रेजेंटेशन दिया। इसके जरिए प्लांट संचालन के दौरान सुरक्षा मानकों और जोखिम प्रबंधन को लेकर जानकारी साझा की गई। उद्योगों को एक-दूसरे से सीखने की सलाह औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने कहा कि सभी उद्योगों को आपसी तालमेल बनाए रखना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि उद्योग एक-दूसरे के प्लांट की सुरक्षा व्यवस्था का अध्ययन करें और जो व्यवस्थाएं बेहतर हों, उन्हें अपने प्लांट में भी लागू करें। पूरे महीने में 12 मॉक ड्रिल आयोजित उप संचालक राजेश पटेल ने बताया कि पूरे महीने में अब तक करीब 12 मॉक ड्रिल आयोजित की जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि वर्कशॉप और मॉक ड्रिल का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। इसमें प्लांट प्रतिनिधियों को बॉयलर क्षेत्र, ऊंचाई पर काम करने और अन्य औद्योगिक जोखिमों से सुरक्षा के उपायों की जानकारी दी जा रही है।
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