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बेमेतरा जिले के नवागढ़ ब्लॉक मुख्यालय से लगे ग्राम सीतापार में सोमवार को जिला प्रशासन ने विवादित जमीन पर बने भवनों को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया। करोड़ों रुपए की लागत से बने निर्माणों को गिराने के लिए आधा दर्जन से अधिक जेसीबी मशीनें लगाई गईं। मौके पर किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। जानकारी के अनुसार, सीतापार स्थित जिस भूमि पर कार्रवाई की गई, उसे 6 लोगों ने रजिस्ट्री के माध्यम से खरीदा था। जमीन खरीदने के बाद उन्होंने लाखों रुपए खर्च कर मकानों और बाकी निर्माण कार्यों को अंजाम दिया था। लेकिन बाद में राजस्व अभिलेखों, प्रशासनिक जांच और न्यायालयीन प्रक्रिया के दौरान उक्त भूमि को सरकारी मरघट (श्मशान) भूमि बताया गया। जिसके बाद मामला विवादों में आ गया। भूमि सरकारी तो रजिस्ट्री कैसे हुई ? प्रशासन का कहना है कि न्यायालय के निर्देश और पूर्व में जारी नोटिसों के बाद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई है। प्रभावित लोगों का आरोप है कि उन्होंने जमीन की वैधानिक रजिस्ट्री कराई थी। उनका सवाल है कि यदि भूमि सरकारी या घास भूमि थी तो उसकी रजिस्ट्री कैसे हुई। उनका कहना है कि संबंधित दस्तावेजों और राजस्व अभिलेखों के आधार पर ही जमीन खरीदी गई थी। बताया जा रहा है कि इस मामले को लेकर लंबे समय से कानूनी लड़ाई चल रही थी। प्रभावित पक्ष का दावा है कि उन्हें हाईकोर्ट से राहत और स्टे आदेश भी मिला था। हालांकि स्टे की अवधि समाप्त होने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए निर्माणों को जमींदोज कर दिया। जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जांच की मांग इस कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवारों में भारी नाराजगी देखने को मिली। उनका कहना है कि उन्होंने जीवनभर की जमा पूंजी मकान निर्माण में लगा दी थी और अब एक ही दिन में सब कुछ मलबे में तब्दील हो गया। कई परिवारों ने प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जांच की मांग की है। कुछ भी कहने से बच रहे अधिकारी एक तरफ प्रशासन सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की बात कह रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रभावित परिवार अपनी मेहनत की कमाई डूबने का दर्द बयां कर रहे हैं। फिलहाल मामले में प्रशासनिक अधिकारी खुलकर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि आगे कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं।
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