बिलासपुर के क्लेम कोर्ट ने फर्जी तरीके से एक्सीडेंट का वाहन बदलकर करीब 45 लाख रुपये का इंश्योरेंस क्लेम हड़पने की एक बड़ी और सोची-समझी साजिश का पर्दाफ …और पढ़ें

HighLights
- जज मनीषा ठाकुर का बड़ा फैसला
- वंदना अस्पताल के पुलिस मेमो में काट-छांट
- क्लेम लेने की कोशिश नाकाम
नईदुनिया प्रतिनिध,बिलासपुर। षष्टम अतिरिक्त मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण की पीठासीन अधिकारी मनीषा ठाकुर के न्यायालय ने फर्जी तरीके से वाहन बदलकर इंश्योरेंस क्लेम हासिल करने की कोशिश को नाकाम करते हुए 44.80 लाख की मुआवजा याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया है। अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर पाया कि दुर्घटना वास्तव में एक कार से हुई थी, लेकिन 44.80 लाख का क्लेम हड़पने के उद्देश्य से बाद में साठगांठ कर एक मोटर सायकल को इस हादसे में झूठा संलिप्त किया गया।
मामला सिविल लाइन थाना क्षेत्र का है, जहां आवेदिका मालती बंजारे और अविनल बंजारे ने दावा किया था कि 9 फरवरी 2023 की सुबह उनका 21 वर्षीय पुत्र अंकित बंजारे अपनी पल्सर बाइक से जा रहा था। तभी 36 मॉल के पास अनावेदक राहुल पात्रे ने अपनी मोटर सायकल सीजी 10 बीजे 7847 को लापरवाही पूर्वक चलाते हुए उसे टक्कर मार दी, जिससे उपचार के दौरान अंकित की मौत हो गई।
मामले में मुख्य मोड़ तब आया जब वंदना अस्पताल के चिकित्सक डॉ. विजय कुमार ने गवाही दी कि भर्ती के समय मृतक की मां ने खुद हादसे का कारण ‘कार की टक्कर’बताया था। अस्पताल के मूल पुलिस मेमो (प्रदर्श डी-01 व डी-02) में भी ‘कार से टकरा गया’ दर्ज था। कोर्ट ने पाया कि आवेदकों द्वारा प्रस्तुत रिकॉर्ड (प्रदर्श पी-03) में कार शब्द को मिटाकर ‘मोटर सायकल’ लिखा गया था, जो साफ तौर पर हेरफेर को दर्शाता है।
चश्मदीद गवाह के बयान विरोधाभास
इसके अतिरिक्त, मृतक के पिता ने दुर्घटना के तीन दिन बाद ‘अज्ञात वाहन’ के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसका कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। कोर्ट ने कथित चश्मदीद गवाह के बयानों को भी विरोधाभासी और अविश्वसनीय माना, क्योंकि घटना के समय वह मौके से 3 किलोमीटर दूर रहता था। पुलिस जप्ती के बावजूद कोर्ट में वाहन का कोई मैकेनिकल मुलाहिजा पेश नहीं किया गया, जिससे बाइक पर दुर्घटना के कोई विधिक साक्ष्य नहीं मिले।
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