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जशपुरनगर में रविवार को डिलिस्टिंग के विरोध में हजारों आदिवासी सड़क पर उतर आए। राजी पड़हा ने ईसाई आदिवासी महासभा के सहयोग से इस विशाल रैली का आयोजन किया था। रैली में शामिल होने के लिए सैकड़ों आदिवासी शहर के रांची रोड स्थित शासकीय एनईएस कॉलेज के मैदान में एकत्र हुए। चिलचिलाती धूप के बावजूद, हाथों में छतरी लिए आदिवासियों ने डिलिस्टिंग विरोधी नारे लगाए। रैली जैन मंदिर, बस स्टैंड, महाराजा चौक, जय स्तंभ चौक, भागलपुर चौक होते हुए बीटीआई ग्राउंड पहुंची। कुनकुरी के पूर्व विधायक और कांग्रेस के जिलाध्यक्ष यूडी मिंज ने इस दौरान कहा कि जनजातीय सुरक्षा मंच द्वारा दिल्ली में डिलिस्टिंग की मांग को लेकर आयोजित सभा आदिवासियों को बांटने की साजिश है। उन्होंने दावा किया कि आदिवासियों को कानूनन किसी भी धर्म का पालन करने की छूट है। मिंज ने बताया कि जिले में 24 प्रतिशत आबादी ईसाइयों की है। यदि डिलिस्टिंग लागू होती है, तो पांचवीं अनुसूची लागू नहीं रह पाएगी, जिसका सीधा नुकसान आदिवासियों को होगा। राजी पड़हा समिति के जिलाध्यक्ष राजेश भगत ने कहा कि राजी पड़हा डिलिस्टिंग की मांग का पुरजोर विरोध करती रही है और आगे भी करेगी। ईसाई आदिवासी महासभा के प्रदेश अध्यक्ष अनिल किस्पोट्टा ने भी दोहराया कि आदिवासियों को अपनी इच्छा से किसी भी धर्म का पालन करने का अधिकार है और डिलिस्टिंग पांचवीं अनुसूची को समाप्त करने की साजिश है। सभा में वक्ताओं ने छत्तीसगढ़ में सरना धर्म कोड लागू करने की मांग भी उठाई।
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