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जशपुर जिले में अपराध जांच प्रणाली को आधुनिक और वैज्ञानिक बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ शासन और पुलिस प्रशासन ने जशपुर पुलिस को अत्याधुनिक मोबाइल फॉरेंसिक वैन उपलब्ध कराई है। “लैब ऑन व्हील्स” नामक इस वैन को बुधवार को रक्षित केंद्र जशपुर से जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। अब हत्या, दुर्घटना, साइबर अपराध, नारकोटिक्स समेत अन्य गंभीर मामलों में घटनास्थल पर ही वैज्ञानिक जांच और साक्ष्य संग्रहण किया जा सकेगा। डीआईजी-एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह ने बताया कि राज्य में अपराध जांच को अधिक प्रभावी, वैज्ञानिक और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से स्टेट फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी रायपुर ने इस अत्याधुनिक मोबाइल फॉरेंसिक वैन की शुरुआत की है। उन्होंने कहा कि यह नई आपराधिक कानून व्यवस्था के तहत एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि 1 जुलाई 2024 से लागू भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) 2023 में वैज्ञानिक जांच को विशेष महत्व दिया गया है। सात वर्ष या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में फॉरेंसिक टीम की उपस्थिति और वैज्ञानिक साक्ष्य संग्रह अनिवार्य किया गया है। घटनास्थल पर ही होगी जांच “लैब ऑन व्हील्स” के जरिए घटनास्थल पर प्रारंभिक जांच, साक्ष्य संरक्षण और विश्लेषण किया जा सकेगा। इससे साक्ष्यों के नष्ट होने की संभावना कम होगी और जांच प्रक्रिया अधिक सटीक बनेगी। राज्य शासन ने लगभग 65 लाख रुपये प्रति यूनिट लागत से 32 मोबाइल फॉरेंसिक वैन प्रदेश के विभिन्न जिलों को उपलब्ध कराई हैं। जशपुर जिले को मिली यह वैन अत्याधुनिक तकनीक और आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित है। वैन में उपलब्ध प्रमुख सुविधाएं “बेगुनाह पिसे नहीं, गुनहगार बचे नहीं” : रायमुनी भगत विधायक रायमुनी भगत ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार पुलिस व्यवस्था के आधुनिकीकरण के लिए लगातार काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि हत्या, दुष्कर्म, नशे से जुड़े अपराधों समेत महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले मामलों में कई बार साक्ष्यों के अभाव में आरोपी न्यायालय से बरी हो जाते थे, लेकिन अब वैज्ञानिक जांच प्रणाली से वास्तविक अपराधियों की पहचान आसान होगी। उन्होंने कहा कि यह मोबाइल फॉरेंसिक वैन डायल-112 सेवा से भी जुड़ी रहेगी, जिससे घटनास्थल पर त्वरित कार्रवाई और वैज्ञानिक जांच सुनिश्चित होगी। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा, “बेगुनाह पिसे नहीं, गुनहगार बचे नहीं।”
न्याय व्यवस्था को मिलेगी मजबूती जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव ने इसे न्याय व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक उपकरणों की मदद से अपराध जांच प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और प्रभावी बनेगी। नगरपालिका अध्यक्ष अरविंद भगत ने कहा कि अब घटनास्थल पर साक्ष्यों का सुरक्षित और त्वरित संग्रह संभव होगा, जिससे दोषियों की पहचान और न्यायालय में दोष सिद्ध करना आसान बनेगा। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक जांच प्रणाली से अपराधियों के बच निकलने की संभावना काफी कम हो जाएगी। जिला पंचायत सीईओ अभिषेक सिंह ने कहा कि पहले साक्ष्यों को जांच के लिए बाहर भेजना पड़ता था, जिससे रिपोर्ट आने में देरी होती थी और साक्ष्य दूषित होने का खतरा बना रहता था। अब मौके पर ही प्रारंभिक जांच होने से जांच प्रक्रिया अधिक तेज और प्रभावी बनेगी। वैज्ञानिक जांच से अपराधियों पर शिकंजा फॉरेंसिक वैज्ञानिक अधिकारी सलीम कुजूर ने बताया कि “लैब ऑन व्हील्स” के जरिए घटनास्थल पर वैज्ञानिक जांच, साक्ष्य संरक्षण और प्रारंभिक परीक्षण संभव होगा। इससे रिपोर्टिंग अधिक तेज और सटीक होगी, साथ ही न्याय प्रक्रिया भी मजबूत बनेगी। उन्होंने कहा कि यह मोबाइल फॉरेंसिक वैन “विज्ञान की शक्ति से सशक्त जांच और त्वरित न्याय” की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य वैज्ञानिक जांच, सटीक साक्ष्य और सुरक्षित समाज की अवधारणा को मजबूत करना है।
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