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बलौदाबाजार में मंगलवार को आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम में कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने एक नई पहल की। उन्होंने ग्रामीणों को अपने पास बिठाकर उनकी समस्याएं सुनीं और अफसरशाही की पारंपरिक दूरी को खत्म किया। कलेक्टर शर्मा ने ग्रामीणों की शिकायतों को संवेदनशीलता से सुना और मौके पर ही समाधान के निर्देश दिए। इस बार जनदर्शन में एक विशेष व्यवस्था भी की गई थी, जिसके तहत दूरदराज के ग्रामीण विकासखंड मुख्यालयों से ऑनलाइन माध्यम से जुड़े। सिमगा, पलारी, कसडोल सहित कई विकासखंडों के ग्रामीणों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपनी समस्याएं कलेक्टर तक पहुंचाईं। कार्यक्रम के दौरान एक ऐसा मामला सामने आया जिसने सबका ध्यान खींचा। विकासखंड सिमगा के ग्राम लिमतरा निवासी रामचंद्र (पिता समारु राम) ने ऑनलाइन जुड़कर अपनी शिकायत दर्ज कराई। रामचंद्र ने बताया कि उन्होंने कभी किसी बैंक में हस्ताक्षर नहीं किए, फिर भी उन्हें बिना जानकारी के एक ऋण का जमानतदार बना दिया गया है। उन्होंने कहा, “साहब, मैंने कभी किसी बैंक में हस्ताक्षर ही नहीं किए, लेकिन आज मैं जमानतदार बनकर परेशान हो रहा हूं।” उनके अनुसार, वर्ष 2017-18 में गांव के शिवकुमार टंडन (पिता सोमनाथ टंडन) ने जिला अंत्याव्यवसायी सहकारी विकास समिति बलौदाबाजार से ट्रैक्टर खरीदने के लिए ऋण लिया था। रामचंद्र का आरोप है कि उन्हें बिना बताए इस ऋण में जमानतदार बना दिया गया, जबकि उनके कोई हस्ताक्षर या दस्तावेज नहीं हैं। अब जब मूल हितग्राही ने ऋण नहीं चुकाया है, तो बैंक अधिकारी उन्हें जेल भेजने की धमकी दे रहे हैं। कलेक्टर ने अधिकारी को लगाई फटकार कलेक्टर ने यह सुनते ही तुरंत वहां मौजूद जिला अंत्यवसायी अधिकारी को फटकारते हुए कहा, यह कैसी व्यवस्था है? बिना हस्ताक्षर के किसी को जमानतदार कैसे बनाया जा सकता है? मामले की जांच कराएं और दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करें। इसके बाद कलेक्टर ने रामचंद्र को ढांढस बंधाते हुए कहा, आप बिल्कुल निराश न हों। आपके साथ अन्याय हुआ है। मैं खुद इस मामले की मॉनिटरिंग करूंगा। यहीं नहीं, जनदर्शन में कई अन्य ग्रामीणों ने भी अपनी समस्याएं रखीं। किसी ने पीएम आवास की किस्त न मिलने की शिकायत की तो किसी ने महतारी वंदन योजना से पैसे न आने का दर्द बताया। कई महिलाओं ने पेंशन बंद होने और राशन कार्ड में नाम न होने की शिकायत की। कुछ ग्रामीणों ने राजस्व से जुड़ी जमीन के मामले भी उठाए। हर आवेदन को कलेक्टर ने गंभीरता से लिया। उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को एक-एक करके निर्देश दिए कि 15 दिनों के भीतर हर शिकायत का निराकरण करें और इसकी रिपोर्ट उन्हें सौंपें। जनदर्शन खत्म होने तक ग्रामीणों के चेहरे पर संतोष की मुस्कान थी। एक ग्रामीण ने कहा, आज जाकर लगा कि हमारी भी सुनने वाला कोई है। कलेक्टर साहब ने हमें बच्चों की तरह प्यार से समझा और हर बात सुनी।
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