राज्य ब्यूरो, रायपुर। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शिक्षा व्यवस्था को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार को कड़ी टिप्पणी करते हुए सभी स्वीकृत पदों पर भर्ती प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने 848 विशेष शिक्षक पद स्वीकृत होने के बावजूद केवल 100 पदों पर भर्ती शुरू किए जाने पर नाराजगी जाहिर की। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि शेष सभी पदों पर भर्ती प्रक्रिया दो महीने के भीतर पूरी की जाए।
संविदा शिक्षकों को भी मिलेगा अवसर
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया कि विशेष स्कूलों में संविदा पर कार्यरत शिक्षकों की नियुक्ति पर विधिसम्मत तरीके से विचार किया जाए। अदालत ने कहा कि वर्तमान में कार्यरत 155 ब्लाक रिसोर्स पर्सन और निश्चित मानदेय पर कार्यरत 85 विशेष शिक्षकों को स्क्रीनिंग कमेटी के समक्ष प्रस्तुत होने का अवसर दिया जाए।
कोर्ट ने कहा कि यदि ये शिक्षक भारतीय पुनर्वास परिषद (आरसीआइ) द्वारा निर्धारित शैक्षणिक और व्यावसायिक योग्यताओं को पूरा करते हैं, तो उनकी नियुक्ति पर नियमानुसार विचार किया जाना चाहिए।
RCI टीचर एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई
यह आदेश सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ RCI टीचर एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका की सुनवाई के दौरान दिया। मामले में राजनीश कुमार पांडेय एवं अन्य बनाम भारत संघ एवं अन्य प्रकरण पर सुनवाई हुई।
याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड कौस्तुभ शुक्ला और अधिवक्ता पलाश तिवारी ने पक्ष रखा। कौस्तुभ शुक्ला ने लंबित प्रकरण में हस्तक्षेप आवेदन भी प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के हलफनामे के अनुसार प्रदेश में विशेष शिक्षकों के कुल 848 पद स्वीकृत हैं।
49 हजार बच्चों के लिए शिक्षकों की कमी
याचिका में सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि प्रदेश में 49 हजार से अधिक विशेष आवश्यकता वाले बच्चे हैं। इन बच्चों की शिक्षा के लिए लगभग 3,981 विशेष शिक्षकों की जरूरत है।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को जुलाई 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इससे पहले भी अदालत के हस्तक्षेप के बाद ही 100 रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी। इनमें 62 शिक्षकों की नियुक्ति हो चुकी है, जबकि 38 पद शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से जुड़े कारणों के चलते अब भी रिक्त हैं।
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