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कोरबा जिले में भीषण गर्मी और लू से सैकड़ों चमगादड़ों की मौत हो गई है। यह घटना पाली विकासखंड के नौकोनिया तालाब किनारे शनिवार को सामने आई, जहां हीट स्ट्रोक से चमगादड़ पेड़ों से गिरकर मर गए। रविवार को भी दोपहर में कुछ और चमगादड़ों की मौत हुई है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, पिछले कई दिनों से क्षेत्र में तापमान 42 से 43 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। नौकोनिया तालाब के पास पेड़ों पर हर साल हजारों प्रवासी चमगादड़ बसेरा करते हैं। इस साल इनकी संख्या अधिक थी। प्रचंड गर्मी और तेज लू के कारण चमगादड़ गर्मी बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं। वे बेहोश होकर पेड़ों से नीचे गिर रहे हैं, जिससे तालाब किनारे सैकड़ों मृत चमगादड़ों के शव बिखर गए हैं। दफनाए गए मृत चमगादड़ इस मंजर को देखकर ग्रामीण चिंतित हो गए और उन्हें संक्रमण फैलने का डर सताने लगा। तत्काल वन विभाग को सूचना दी गई, जिसके बाद वन अमला मौके पर पहुंचा और स्थिति का जायजा लिया। वन विभाग द्वारा मृत चमगादड़ों को जेसीबी से गड्ढा खोदकर दफनाया जा रहा है। साथ ही, पेड़ों पर पानी का छिड़काव कर जीवित चमगादड़ों को गर्मी से राहत देने का प्रयास किया जा रहा है। जांच में हीट स्ट्रोक की पुष्टि पाली वन परिक्षेत्र के रेंजर योगेश्वर बंजारे ने बताया कि सूचना मिलने के बाद टीम मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जानकारी ली। इसके बाद पशु चिकित्सकों की टीम को जांच के लिए बुलाया गया। जांच में पता चला कि तेज गर्मी और हीट स्ट्रोक की वजह से चमगादड़ों की मौत हुई है। मौके पर करीब 200 चमगादड़ मृत मिले, जिन्हें जांच के बाद जला दिया गया। गर्मी से अस्पतालों में बढ़ रही मरीजों की संख्या इस बीच, भीषण गर्मी का असर इंसानों पर भी पड़ रहा है। जिला अस्पताल और निजी क्लीनिकों में डिहाइड्रेशन, उल्टी-दस्त और लू के मरीजों की संख्या में अचानक वृद्धि हुई है। डॉक्टरों ने नौतपा से पहले ही गर्मी के तेवर को देखते हुए स्थिति बिगड़ने की आशंका जताई है। दोपहर 12 बजे के बाद सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता है और बाजार और मुख्य मार्ग वीरान दिखते हैं। लोग केवल आवश्यक कार्य होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं।
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