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छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिला के जंगल में कई वन्यप्राणी विचरण करते हैं। ऐसे में 4 साल में होने वाले बाघ गणना को लेकर अब गणना प्रक्रिया शुरू की गई है। जहां वनकर्मी सुबह से मांसाहारी व शाकाहारी जानवरों की गिनती कर प्रपत्र भर रहे हैं। बाघ गणना की इस प्रक्रिया के लिए जिला स्तर पर सभी वनकर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया था। इसके बाद 23, 24 और 25 जनवरी को मांसाहारी जानवर की गिनती के लिए वनकर्मियों ने जंगल के खाक छाने। बताया जा रहा है कि इसमें 5 किमी तक वनकर्मियों को चलना होता है और मांसाहारी जानवर के खरोंच व कई तरह के निशान को देखकर ऑन लाईन-ऑफ लाईन प्रपत्र में भर रहे हैं। इसके अलावा अब मंगलवार से शाकाहारी जानवर की गणना की प्रक्रिया शुरू की गई है। जिसमें विभाग द्वारा बनाए गए ट्रांजिट लाईन में चलकर शाकाहारी वन्यप्राणियों की गिनती कर प्रपत्र में भरा जा रहा है। जिसके बाद रिपोर्ट उच्च विभाग में जाएगा। वन्यप्राणियों की गणना गुरूवार तक चलेगी। तेंदुआ, भालू और हाथी के निशान
रायगढ़ वन मंडल में रायगढ़, खरसिया, तमनार और घरघोड़ा रेंज है। जहां सभी रेंज के बीट के जंगलों में वन्यप्राणियों की गणना की जा रही है। जिसमें तेंदुआ, भालू, जंगली सुअर, चीतल, कोटरी, हाथी के साथ ही अन्य वन्यप्राणियों के पदचिन्ह व अन्य निशान मिल रहे हैं। रायगढ़ के जंगल में मुख्य तौर पर हाथी है
इस संबंध में DFO अरविंद पीएम ने बताया कि अभी पूरे राज्य में बाघ गणना करने का निर्देश मिला है। इसके लिए एक प्रशिक्षण भी हुआ है। प्रशिक्षण के बाद पूरे स्टाप इस काम को कर रहे हैं। जंगल के अंदर सीधे लाईन में चलते हैं और जो भी निशान, पंजा व अन्य निशान मिलते हैं उसे नोट करते हैं। हर जानवर का इसमें गणना होती है। रायगढ़ में मुख्य तौर पर देखा जाए तो पूरे जिले में हाथी हैं। इसके अलावा तेंदुआ-भालू व अन्य छोटे वन्यप्राणी भी हैं।
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