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बस्तर की जनजातीय संस्कृति, परंपरा और लोक कलाओं का सबसे बड़ा मंच बस्तर पंडुम 2026 अब संभाग स्तर पर पहुंच गया है। 7 से 9 फरवरी तक आयोजित होने वाली संभाग स्तरीय प्रतियोगिता में बस्तर संभाग के सातों जिलों से चयनित 84 दलों के 705 कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। यह आयोजन अब केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि बस्तर की सांस्कृतिक पहचान को सहेजने और आगे बढ़ाने का एक बड़ा उत्सव बन चुका है। एक साल में तीन गुना बढ़ी भागीदारी आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में विकासखंड स्तर पर जहां 15 हजार 596 प्रतिभागियों ने भाग लिया था, वहीं 2026 में यह संख्या बढ़कर 54 हजार 745 तक पहुंच गई है। यह बढ़ोतरी बताती है कि बस्तर के लोग अपनी लोक संस्कृति और परंपराओं को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक हो रहे हैं। दंतेवाड़ा बना सबसे आगे भागीदारी के मामले में दंतेवाड़ा जिला पूरे संभाग में सबसे आगे रहा है। यहां से 24 हजार 267 पंजीयन हुए हैं। इसके बाद कांकेर, बीजापुर और सुकमा जिलों से भी हजारों कलाकारों ने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। 12 विधाओं में होंगे प्रदर्शन संभाग स्तरीय प्रतियोगिता में कुल 12 जनजातीय विधाओं का प्रदर्शन किया जाएगा। 192 कलाकार जनजातीय नृत्य में, 134 कलाकार जनजातीय नाटक सहित अन्य विधाओं में, 65 कलाकार पारंपरिक वाद्ययंत्रों में, 56 प्रतिभागी जनजातीय व्यंजन-पेय प्रतियोगिता में, इसके अलावा वन औषधि, चित्रकला, शिल्प कला, आभूषण निर्माण और आंचलिक साहित्य का भी प्रदर्शन होगा। महिला-पुरुष सहभागिता में संतुलन संभाग स्तर पर पहुंचे 705 प्रतिभागियों में 340 महिलाएं और 365 पुरुष शामिल हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में महिलाएं भी बराबरी से भूमिका निभा रही हैं। तीन दिन बस्तर की संस्कृति के नाम तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में जनजातीय नृत्य, गीत, नाटक, पारंपरिक वाद्य, स्थानीय व्यंजन और कला-संस्कृति बस्तर की पहचान को मजबूती से सामने रखेंगे।
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