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पुलिस कमिश्नर सिस्टम में सभी थानेदारों को निर्देश दिया गया है कि लूट, चोरी, मारपीट और महिलाओं से जुड़े संगीन मामलों में तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए। किसी भी पीड़ित को ये शिकायत न हो कि उसकी शिकायत पर एफआईआर या सुनवाई नहीं हो रही है। उसे अर्जी लेकर थाने के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। हम रायपुर में शिकायत रहित व्यवस्था बना रहे हैं। थानों में गंभीर मामलों में तत्काल एफआईआर दर्ज होगी। ये कहना है रायपुर के पहले पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला का। वे मंगलवार को दैनिक भास्कर कार्यालय पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि मैं रायपुर पुलिस को प्रो-एक्टिव(खुद पहल करने वाली) बनाना चाहता हूं। उन्होंने बताया कि साइबर फ्रॉड के मामलों में भी कार्रवाई की जाएगी, चाहे ठगी 6 हजार रुपए की ही क्यों न हो। क्योंकि एफआईआर दर्ज होने से उसकी जांच होगी। इससे अपराधी पकड़ा जाएगा और उसका रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। अपराध दर्ज नहीं होने से अपराधियों के हौसले बुलंद होते हैं। 5000 रुपए की चोरी के मामले की जांच के लिए भी घटना स्थल पर डीसीपी और एडिशनल डीसीपी जाएंगे। जांच सिपाही-हवलदार के भरोसे नहीं छोड़ी जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने उन्हें बड़ी जिम्मेदारी और जवाबदेही सौंपकर टीम पर भरोसा किया है। हम वर्दी के सम्मान के साथ लोगों का भरोसा जीतने पर जोर दे रहे हैं। यहां पेश हैं भास्कर के सवालों पर डॉ. संजीव शुक्ला के जवाब…
मौजूदा हालात में राजधानी रायपुर में पुलिस के लिए क्या चुनौतियां हैं? -रायपुर एक तरह से पुराना शहरी शहर है। यहां ट्रैफिक सुधारने से लेकर अपराध कम करना बड़ी चुनौती है। पुलिस को डी-एक्टिवेट से प्रो-एक्टिव मोड में लाना है। शहर में अपराध कम हो, ऐसी पुलिसिंग करनी है। शहर में आबादी के साथ गाड़ियों की संख्या बढ़ी है। सड़कें सीमित हैं, पार्किंग कम है। शहर को जाम मुक्त करने पर काम किया जा रहा है। विशेषज्ञों की मदद से नए प्लान तैयार किए जा रहे हैं। नशे को रोकने के लिए उसकी सप्लाई चेन रोकी जा रही है और डिमांड कम करने पर काम किया जा रहा है। यह जनता के सहयोग से ही संभव होगा। क्या रायपुर में अपराध का तरीका बदला है? ऑर्गेनाइज्ड क्राइम बढ़ रही है? -अपराध का तरीका लगातार बदल रहा है। पहले बॉडी ऑफेंस या ऑफलाइन क्राइम होते थे, लेकिन अब ऑनलाइन अपराध बढ़े हैं। यह ग्लोबल हो गया है। पहले स्थानीय अपराधी घटनाएं करते थे, लेकिन अब दूसरे राज्यों से आकर गिरोह वारदात कर रहे हैं। हालांकि रायपुर में कोई बड़ा गिरोह या गैंग सक्रिय नहीं है, लेकिन भविष्य में ऐसा न हो, इसके लिए काम किया जा रहा है। साइबर फ्रॉड बढ़ा है। इसकी वजह लालच और भय है। इसमें कार्रवाई के साथ लोगों को जागरूक किया जा रहा है। बैंकों को भी निर्देश दिए गए हैं कि अपने ग्राहकों को बैंकिंग सुरक्षा को लेकर जागरूक करें। थानों के स्टाफ को साइबर क्राइम की जांच और ट्रैकिंग के लिए तैयार किया जा रहा है। छोटी उम्र में भी लड़के-लड़कियां अपराध कर रहे हैं, क्या नए अपराधी पुलिस के लिए चुनौती हैं? – सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म फायदे के साथ नुकसान भी पहुंचा रहे हैं। यह अपनी बात पहुंचाने का आसान माध्यम है, लेकिन इससे अफवाह और झूठ तेजी से फैल रहे हैं। इसका प्रभाव युवा पीढ़ी पर भी दिख रहा है। नए-नए अपराधी सामने आ रहे हैं। इसलिए हर शिकायत पर केस दर्ज किया जा रहा है। पहले समाज और परिवार छोटी-छोटी बातों पर हस्तक्षेप करते थे, लेकिन अब यह कम हो गया है। उनकी भूमिका बढ़ाने की जरूरत है। बच्चों को अच्छे संस्कार और सही-गलत की जानकारी देना जरूरी है। पुलिस कमिश्नरी लागू होने से आम जनता को क्या फायदा है? -देश के अधिकांश राज्यों में पुलिस कमिश्नरी प्रणाली लागू है। अगर इसका फायदा नहीं होता तो इसे लागू नहीं किया जाता। इसका सबसे बड़ा फायदा जनता को है। उनकी शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई की जा रही है। थानों की मॉनिटरिंग बढ़ गई है। उनके ऊपर कई अधिकारी हैं, जिससे जवाबदेही बढ़ी है। मामलों की बारीकी से जांच हो रही है। 24 घंटे पुलिस सड़कों पर नजर आएगी।
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