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छत्तीसगढ़ के धमतरी स्थित मराठापारा में आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह का समापन रुक्मिणी विवाह के साथ हुआ। सप्तम दिवस पर हुए इस आयोजन में भगवान श्रीकृष्ण की बारात निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में वार्डवासी शामिल हुए। मराठापारा के वार्डवासियों द्वारा पूर्वजों की स्मृति में यह श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह आयोजित किया गया था। समापन अवसर पर रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाया गया, जिसे सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा स्थल पर पहुंचे। भगवान श्रीकृष्ण की झांकी के साथ बारात निकाली इस दौरान मराठापारा वार्ड में भगवान श्रीकृष्ण की झांकी के साथ बारात निकाली गई। बाजे-गाजे के साथ निकली यह बारात कथा स्थल तक पहुंची, जहां वार्डवासियों ने पूजा-अर्चना की। इसके बाद श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के स्वरूपों को कथा पंडाल में लाया गया। विवाह गीतों के साथ रुक्मिणी-कृष्ण विवाह संपन्न व्यासपीठ के समीप रुक्मिणी और कृष्ण के स्वरूपों ने एक-दूसरे को पुष्पमाला पहनाई, जिससे रुक्मिणी विवाह संपन्न हुआ। इस अवसर पर कथा वाचिका देवी भूमिका ने छत्तीसगढ़ी पारंपरिक विवाह गीतों के साथ विवाह का शुभारंभ किया। इसमें चूल्माटी, तेल, हल्दी और मायन जैसी छत्तीसगढ़ी परंपराओं का निर्वहन किया गया। कथा स्थल पर उपस्थित श्रोताओं ने रुक्मिणी और श्रीकृष्ण विवाह के अवसर पर अपनी इच्छानुसार भेंट अर्पित की। देवी भूमिका ने सप्तम दिन उद्धव प्रसंग और रुक्मिणी मंगल विवाह की कथा का श्रवण कराया, जिसे श्रद्धालुओं ने बड़े उत्साह के साथ सुना।
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