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छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले का सोनपुर थाना। यहां की हवालात में आज तक कोई बंद नहीं हुआ। वजह है कि इसके अंतर्गत आने वाले 63 गांव में कभी चोरी-लूट जैसी घटनाएं तक नहीं हुईं। 2020 मेंं बने इस थाने के अंतर्गत 63 गांव आते हैं। इन गांवों में करीब 1500 लोग रहते हैं। नक्सल प्रभावित होने की वजह से यहां अभी तक 36 केस दर्ज हुए हैं। ये सभी नक्सली मुठभेड़ से जुड़े हुए हैं। जब इस थाने के गांवों में भास्कर पहुंचा तो लोगों ने बताया कि हमने कभी ताला खरीदा ही नहीं। गांव में अगर छोटा विवाद होता भी है तो हम सभी मिलकर निपटा लेते हैं। थाने का दरवाजा हमने कभी नहीं देखा। हवालात का दरवाजा मतपेटियों के लिए खुला
सोनपुर थाने में तैनात प्रधान आरक्षक दिनेश कुमार तामो बताते हैं कि यहां 23 लोग तैनात है। थाने में आज तक कोई शिकायत लेकर तक नहीं आया। यहां न ताे जमीन विवाद होता है और न किसी तरह का झगड़ा। अधिकतर गांवों में आदिवासी रहते हैं। वे इतने सीधे हैं कि किसी से तेज आवाज में भी बात नहीं करते। हवालात भी पांच साल में केवल एक बार ही खुला। पंचायत चुनाव के दौरान मतपेटियों को यहीं रखा गया था। उसके निशान आज भी हवालात का दरवाजा देखने को मिल जाएंगे। यही वजह है कि हवालात हमेशा खुली रहती हैं। हमने कभी यहां ताला तक नहीं लगाया। लोग बोले-घर में नहीं लगाते ताले गरपा की रहने वाली सुकमती मेटामी बताती हैं कि हमारे गांव के किसी घर में कभी ताले नहीं लगते। अगर कोई बीमार हो जाता है और मजबूरी में किसी को बाहर जाना पड़ता है तो पूरा गांव उस घर की रखवाली करता है। कभी किसी वजह से कोई आपस में लड़ता है तो पंच लोग बैठकर जो निर्णय लेते हैं, उसे सभी मानते हैं। हमें तो पता भी नहीं है कि हमारे गांव के लिए कोई थाना भी है। पुलिस वाले कभी एक-दो महीने में दिखते हैं तो हमें यही लगता है कि वे नक्सलियों को खोज रहे होंगे।
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