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राज्य शासन ने जनजातीय लोक परंपरा, कला, संस्कृति और जीवनशैली के संरक्षण व संवर्धन के उद्देश्य से शुरू किए गए बस्तर पंडुम कार्यक्रम के तहत “बस्तर पंडुम 2026” का आयोजन किया। यह दो दिवसीय जनपद स्तरीय कार्यक्रम 18 से 19 जनवरी 2026 तक जनपद पंचायत केशकाल में संपन्न हुआ। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य बस्तर संभाग की स्थानीय कला, संस्कृति, परंपरा, लोककला, शिल्प, तीज-त्योहार, खानपान, बोली-भाषा, रीति-रिवाज, वेश-भूषा, आभूषण, वाद्य यंत्र, पारंपरिक नृत्य, गीत-संगीत, नाट्य, व्यंजन, पेय पदार्थ, आंचलिक साहित्य और वन औषधियों के मूल स्वरूप का संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार करना था। इसके साथ ही, जनजातीय कला समूहों को सतत विकास के अवसर प्रदान करते हुए कलाकारों को प्रोत्साहित और सम्मानित करना भी एक प्रमुख लक्ष्य रहा। राज्य शासन ने साल 2025 से बस्तर संभाग की लोक परंपरा और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए बस्तर पंडुम कार्यक्रम शुरू किया है। 12 विधाओं में आयोजित हुई प्रतियोगिताएं प्रारंभ में इसमें कुल 7 प्रकार की विधाएं शामिल थीं, जिन्हें इस साल विस्तार देकर 12 प्रकार की विधाओं में प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इनमें जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, वेश-भूषा, आभूषण, शिल्प, चित्रकला, व्यंजन-पेय पदार्थ, आंचलिक साहित्य और पारंपरिक वन औषधियों का प्रदर्शन शामिल था। जनपद स्तरीय आयोजन में 382 प्रतिभागियों की सहभागिता बस्तर पंडुम 2026 के जनपद स्तरीय आयोजन में ग्राम पंचायत स्तर से कुल 382 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिनमें 107 महिलाएं और 275 पुरुष शामिल थे। प्रतिभागियों ने अपनी पारंपरिक कला, संस्कृति और लोक जीवन से जुड़े विविध रंगों का सजीव प्रदर्शन कर दर्शकों को आकर्षित किया। इस प्रतियोगिता से चयनित प्रतिभागी आगामी जिला स्तरीय प्रतियोगिता में जनपद केशकाल का प्रतिनिधित्व करेंगे।
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