भास्कर न्यूज | कवर्धा जिले में जिला पंचायत सीईओ सहित 10 विभाग में स्थाई अधिकारी ही नहीं है। शासकीय विभागों में लंबे समय से नियमित अधिकारियों के अभाव में प्रभारी व्यवस्था के सहारे संचालित हो रहे हैं। स्थिति यह है कि एक ही अधिकारी को दो से तीन जिलों या विभागों का प्रभार सौंप दिया गया है, जिससे प्रशासनिक कार्यों की गति और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो रही हैं। यह स्थिति महीनों से बनी हुई है, लेकिन अब तक स्थायी पदस्थापना नहीं हो सकी है। जिले की स्थिति देखे तो यहां होमगार्ड का प्रभार दुर्ग जिले में पदस्थ नागेंद्र सिंह के पास है। इसी तरह उद्यानिकी विभाग का प्रभार बेमेतरा के हितेंद्र मेश्राम संभाल रहे हैं। वहीं पंजीयक कार्यालय का प्रभार एसएल नेताम के पास है,इनके पास बेमेतरा जिले का चार्ज भी है। श्रम विभाग में लेबर ऑफिसर विकास कुमार सिरोधे दुर्ग में पदस्थ है। जिनके पास बालोद, कवर्धा और दुर्ग तीनों जिलों का प्रभार उन्हीं के जिम्मे है। जनपद पंचायत स्तर पर भी हालात बेहतर नहीं हैं। लोहरा जनपद में एपीओ शिव साहू को सीईओ का प्रभार दिया गया है, वहीं बोड़ला जनपद पंचायत का प्रभार एपीएओ आकाश सिंह के पास है। पशु चिकित्सा विभाग में नियमित अधिकारी के सेवानिवृत्त होने के बाद डॉ. पीए शुक्ला को प्रभारी बनाया गया है, जो फिलहार अवकाश पर है। इसके अलावा ग्रामीण यांत्रिकी सेवा में सुरेंद्र पटेल प्रभारी हैं, जो कि मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के ईई भी हैं। जिला खेल अधिकारी का प्रभार पंडरिया बीईओ महेन्द्र गुप्ता को सौंपा गया है। जिले में प्रभारी अधिकारियों के कारण काम प्रभावित होने को लेकर कलेक्टर गोपाल वर्मा से मोबाइल पर संपर्क किया गया। लेकिन उनका नंबर कवरेज से बाहर होने के कारण बात नहीं हो पाई। प्रभारी व्यवस्था के कारण इन विभागों से जुड़े कार्य प्रभावित हो रहे हैं। होमगार्ड विभाग में भर्ती, प्रशिक्षण, आपदा प्रबंधन व कानून-व्यवस्था से जुड़े सहयोगात्मक कार्यों में समन्वय की कमी देखी जा रही है। उद्यानिकी विभाग में किसानों को सब्सिडी, पौध वितरण, उद्यान विकास योजनाओं की समीक्षा व फील्ड निरीक्षण प्रभावित होता है। पंजीयक कार्यालय में पंजीयन, दस्तावेज सत्यापन और समय सीमा में मामलों के निराकरण में दे, श्रम विभाग में श्रमिक पंजीयन, निर्माण श्रमिकों को मिलने वाली सहायता, फैक्ट्री निरीक्षण और विवाद निपटारे, जिला पंचायत व जनपद पंचायतों में विकास कार्यों की समीक्षा, भुगतान प्रक्रिया, पंचायतों का निरीक्षण और योजनाओं की मॉनिटरिंग कमजोर पड़ी है। इसी प्रकार ग्रामीण यांत्रिकी व खेल विभाग की योजनाएं प्रभावित होती है। जिन विभागों को प्रभारी अफसर संभाल रहे वहां फरियादियों का काम समय पर नहीं हो पा रहा है। उन्हें बार-बार कार्यालयों का चक्कर लगाना पड़ रहा है। इससे लोगो में नाराजगी है। सीईओ का आना अभी मुश्किल: वर्तमान में जिला पंचायत सीईओ के स्थानांतरण के बाद नए सीईओ के रुप में दुर्ग से अभिषेक अग्रवाल का स्थानांतरण किया गया है। लेकिन वर्तमान में एसआईआर का कार्य जारी है। ऐसे में दुर्ग से अभिषेक अग्रवाल का कवर्धा आना मुश्किल लग रहा है। फरवरी माह के बाद भी उनका आना संभव होगा। तब तक प्रभारी सीईओ के रुप में कवर्धा के अपर कलेक्टर विनय पोयाम संभाल रहे है।
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