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राजधानी रायपुर में 10 फरवरी को प्रस्तावित मुख्यमंत्री सामूहिक कन्या विवाह समारोह को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। कार्यक्रम स्थल पर पंडाल और टेंट लगाने का काम भी प्रारंभ कर दिया गया है। इस आयोजन को लेकर कांग्रेस ने आपत्ति दर्ज कराई है और प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। प्रदेश कांग्रेस महामंत्री सुबोध हरितवाल ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस ली। उन्होंने कहा कि आयोजन में नियमों और तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना टेंडर और बिना वर्क ऑर्डर के टेंट लगाने का काम शुरू कर दिया गया है, जो सरकारी नियमों के खिलाफ है। इस दौरान प्रदेश महामंत्री मलकीत सिंह गैदू भी मौजूद थे। सुबोध हरितवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल उठाए – टेंडर प्रक्रिया अभी शुरू भी नहीं हुई है, फिर टेंट पंडाल कैसे और किसने लगाया? – महिला बाल विकास विभाग ने 5 फरवरी 2026 को 5 फार्म प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किए हैं, जिनमें ड्राइंग, डिजाइन और लेआउट देना होगा। इसके बाद ही विभाग डिजाइन अप्रूव करेगा और फिर फाइनेंशियल बिड खोलेगी। इसके बाद ही तय होगा कि टेंडर किसे मिलेगा। – केदार और विपुल कौन हैं? – अभिषेक टेंट हाउस, बिलासपुर वाला कौन है जो वहां काम कर रहा है? – आखिर किसके इशारे पर वहां काम चल रहा है?
बिना टेंडर टेंट कार्य शुरू कराने का आरोप प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेताओं ने बताया कि इस आयोजन से संबंधित टेंट और पंडाल व्यवस्था के लिए अभी एजेंसी चयन की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। इसके बावजूद कार्यक्रम स्थल पर टेंट लगाने का काम शुरू कर दिया गया है। उन्होंने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए कहा कि इस तरह की प्रक्रिया आगे चलकर वित्तीय अनियमितता का कारण बन सकती है। कांग्रेस नेताओं के अनुसार, छत्तीसगढ़ स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (CSIDC) द्वारा इंपैनल किए गए कुल पांच टेंट हाउस को सोमवार को प्रेजेंटेशन के लिए आमंत्रित किया गया है। इनमें दो फर्म दिल्ली की, दो रायपुर की और एक बिलासपुर की है। कांग्रेस का कहना है कि जब प्रेजेंटेशन और चयन की प्रक्रिया अभी चल रही है, तो उससे पहले टेंट लगाने का काम किस आधार पर शुरू किया गया, यह स्पष्ट नहीं है। कांग्रेस ने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री सामूहिक कन्या विवाह समारोह का आयोजन महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत किया जा रहा है और इसकी निगरानी जिला कार्यक्रम अधिकारी शैल ठाकुर द्वारा की जा रही है। इसके बावजूद नियमों के अनुसार टेंडर और वर्क ऑर्डर जारी किए बिना काम शुरू होना सवाल खड़े करता है। मलकीत सिंह गैदू ने कहा कि सामूहिक विवाह जैसे बड़े सामाजिक आयोजन में सरकारी धन का उपयोग होता है और इसमें पारदर्शिता जरूरी है। उन्होंने मांग की कि आयोजन से पहले सभी प्रक्रियाओं को सार्वजनिक किया जाए और संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं। जंबूरी आयोजन के टेंडर विवाद का भी हवाला जंबूरी कार्यक्रम को लेकर टेंडर प्रक्रिया पर भी गंभीर आरोप लगाए गए। कांग्रेस प्रवक्ता सुबोध हरितवाल ने कहा कि जंबूरी आयोजन के लिए जेम पोर्टल पर टेंडर 3 जनवरी को सुबह 12 बजे खुलना था, लेकिन उससे पहले ही आयोजन स्थल पर एक निजी कंपनी ने काम शुरू कर दिया था। सुबोध हरितवाल ने आरोप लगाया कि कई कामों में टेंडर प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही काम शुरू कर दिया गया। नियमों के मुताबिक पहले टेंडर, फिर स्वीकृति और उसके बाद काम शुरू होना चाहिए, लेकिन यहां प्रक्रिया के उलट होने के आरोप सामने आए। कहा गया कि कुछ एजेंसियों को बिना औपचारिक आदेश के काम सौंप दिया गया और बाद में कागजी प्रक्रिया पूरी की गई।
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